Thursday, July 28, 2016

कला और संस्‍कृति के दो सशक्‍त हस्‍ताक्षरों का निधन

लच्छू महाराज और महाश्वेता देवी
वाराणसी/कोलकाता। बनारस घराने के जाने-माने तबला वादक पंडित लच्छू महाराज का वाराणसी के एपेक्स अस्पताल में बुधवार देर रात निधन हो गया। उनका अंतिम संस्कार शुक्रवार को वाराणसी में ही किया जाएगा। वह लंबे समय से बीमार चल रहे थे।

वहीं, लेखिका महाश्वेता देवी का गुरुवार को बेलव्‍यू अस्‍पताल में निधन हो गया। दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया है। वह भी लंबे समय से बीमार चल रही थीं। पश्‍िचम बंगाल की मुख्‍यमंत्री ममता बैनर्जी ने उनके निधन पर शोक जताया है।

बांग्ला साहित्यकार एवं सामाजिक कार्यकर्ता महाश्वेता देवी को 1996 में ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। उन्होंने अपने को एक पत्रकार, लेखक, साहित्यकार और आंदोलनधर्मी के रूप में विकसित किया।

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फक्कड़ स्वाभाव के के माने जाने वाले पं. लच्छू महाराज ने बॉलीवुड की कई फिल्मों में तबला बजाया था। इनकी शिष्य परंपरा के सैकड़ों कलाकार देश-दुनिया में मशहूर हो रहे हैं। पं. लच्छू महाराज के बचपन का नाम लक्ष्मीनारायण सिंह और उन्‍होंने पिता वासुदेव नारायण सिंह से तबला वादन सीखा था।

फिल्म अभिनेता गोविंदा उनके भांजे हैं। लच्छू महाराज ने टीना नाम की फ्रांस की महिला से विवाह किया था। उनकी पुत्री नारायणी अपनी मां के साथ स्विट्जरलैंड में रह रही हैं। वाराणसी में उनकी पत्नी और पुत्री के आने का इंतजार है। मणिकर्णिका घाट पर कल उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।

लच्‍छू महाराज की उम्र 72 वर्ष थी और तबीयत खराब होने के बाद परिजनों ने उन्हें महमूरगंज स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया। मगर, चिकित्सकों की तमाम कोशिशों के बावजूद उनको बचाया नहीं जा सका।
writer mahasweta devi and Indian Tabla Player lacchu Maharaj passed way 

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