शशांक शेखर बाजपेई। मेरा देश वाकई बदल रहा है और इसकी शुरुआत एक गांव से हो चुकी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आठ नवंबर को जब 500 और 1000 रुपए के नोट बंद करने की घोषणा की थी। उसके बाद देशभर में नोट बदलवाने के लिए बैंकों के बाहर और एटीएम में लाइन लग गई थी।मगर, गुजरात के साबरकांठा जिले के हिम्मतनगर उप जिले में स्थित अकोदरा गांव में ऐसा नहीं हुआ। यहां चिप्स के पैकेट खरीदने से लेकर, सब्जी, दूध आदि के लिए नगद पैसे नहीं देने पड़ते हैं। 1500 की आबादी वाले इस गांव में 1200 लोगों के पास बैंक अकाउंट हैं।
पान की दुकान पर भी मोबाइल बैंकिंग और वाई-फाई नेटवर्क है। यही वजह है कि इसे देश के पहले डिजिटल गांव होने का गौरव मिला है। आईसीआईसीआई बैंक ने इस गांव को गोद लेकर पूरी तरह डिजिटल बना दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन-धन योजना का लाभ जैसे इस गांव ने उठाया है, वह काबिले तारीफ है।
गांव पूरी तरह से वाईफाई से लैस है, लेकिन काफी लोगों के पास स्मार्टफोन नहीं हैं। ऐसे में बैंक ने उन्हें एसएमएस के जरिए पैसा ट्रांसफर करने की सुविधा देता है। यहां के लोग सामान खरीदने के बाद फोन पर टेक्स्ट मैसेज भेजकर पैसे चुका देते हैं।
इस मैसेज में पेमेन्ट पाने वाले का अकाउंट नंबर और जितना पैसा ट्रांस्फर किया जाना है, उसकी जानकारी रहती है। यह मैसेज खरीदार अपने बैंक को भेजता है और फिर तुरंत भुगतान हो जाता है।
अहमदाबाद से 90 किमी की दूरी पर स्थित अकोदरा गांव अपने आप में एक मिसाल है। यहां स्कूल के बच्चे भी टैब से पढ़ते हैं और ज्ञान के लिए वे गुरू जी पर ही निर्भर नहीं हैं। गूगल बाबा की मदद से उन्हें देश-दुनिया की सारी खबर है। गांव के स्कूलों में ब्लैकबोर्ड की जगह स्मार्ट बोर्ड ने ले ली है। पढाई डिजिटल हो गई है और बच्चे भी पहले की तुलना में अधिक संख्या में पढ़ने के लिए स्कूल में आ रहे हैं।
डिस्कवरी चैनल ने इसकी डॉक्यूमेंट्ररी भी बनाई है। तो अब हुआ न आपको यकीन कि मेरा देश बदल रहा है...

