Thursday, November 24, 2016

नोटबंदी से बेअसर रहा ये डिजिटल गांव, सच में मेरा देश बदल रहा है...

शशांक शेखर बाजपेई। मेरा देश वाकई बदल रहा है और इसकी शुरुआत एक गांव से हो चुकी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आठ नवंबर को जब 500 और 1000 रुपए के नोट बंद करने की घोषणा की थी। उसके बाद देशभर में नोट बदलवाने के लिए बैंकों के बाहर और एटीएम में लाइन लग गई थी।

मगर, गुजरात के साबरकांठा जिले के हिम्मतनगर उप जिले में स्थित अकोदरा गांव में ऐसा नहीं हुआ। यहां चिप्स के पैकेट खरीदने से लेकर, सब्जी, दूध आदि के लिए नगद पैसे नहीं देने पड़ते हैं। 1500 की आबादी वाले इस गांव में 1200 लोगों के पास बैंक अकाउंट हैं।

पान की दुकान पर भी मोबाइल बैंकिंग और वाई-फाई नेटवर्क है। यही वजह है कि इसे देश के पहले डिजिटल गांव होने का गौरव मिला है। आईसीआईसीआई बैंक ने इस गांव को गोद लेकर पूरी तरह डिजिटल बना दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन-धन योजना का लाभ जैसे इस गांव ने उठाया है, वह काबिले तारीफ है।

गांव पूरी तरह से वाईफाई से लैस है, लेकिन काफी लोगों के पास स्मार्टफोन नहीं हैं। ऐसे में बैंक ने उन्हें एसएमएस के जरिए पैसा ट्रांसफर करने की सुविधा देता है। यहां के लोग सामान खरीदने के बाद फोन पर टेक्स्ट मैसेज भेजकर पैसे चुका देते हैं।

इस मैसेज में पेमेन्ट पाने वाले का अकाउंट नंबर और जितना पैसा ट्रांस्फर किया जाना है, उसकी जानकारी रहती है। यह मैसेज खरीदार अपने बैंक को भेजता है और फिर तुरंत भुगतान हो जाता है।

अहमदाबाद से 90 किमी की दूरी पर स्थित अकोदरा गांव अपने आप में एक मिसाल है। यहां स्कूल के बच्चे भी टैब से पढ़ते हैं और ज्ञान के लिए वे गुरू जी पर ही निर्भर नहीं हैं। गूगल बाबा की मदद से उन्हें देश-दुनिया की सारी खबर है। गांव के स्कूलों में ब्लैकबोर्ड की जगह स्मार्ट बोर्ड ने ले ली है। पढाई डिजिटल हो गई है और बच्चे भी पहले की तुलना में अधिक संख्या में पढ़ने के लिए स्कूल में आ रहे हैं।

डिस्कवरी चैनल ने इसकी डॉक्यूमेंट्ररी भी बनाई है। तो अब हुआ न आपको यकीन कि मेरा देश बदल रहा है... 

Wednesday, November 9, 2016

100 दिनों में क्या ट्रंप इन योजनाओं को दे पाएंगे अंजाम

'अमेरिका फर्स्ट' के वादे से लोगों के वोटों को अपनी जीत में बदलने वाले डोनाल्ड ट्रंप के लिए आने वाले दिन आसान नहीं होंगे। चुनाव अभियान के दौरान उन्होंने जो वादे किए थे, उन्हें पूरा करना आसान काम नहीं होगा।
शुरुआती 100 दिनों में उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना होगा। उन्होंने पिछले महीने पेनसिल्वेनिया के गेटिसबर्ग में अपने भाषण में पहले 100 दिनों का एजेंडा देश के सामने रखा था।
उन्होंने कहा था कि अमेरिका से 20 लाख अवैध प्रवासियों को देश निकालने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इस दौरान जो देश अपने नागरिकों को वापस लेने से इनकार करेंगे, उनकी वीजा मुक्त यात्रा की छूट खत्म की जाएगी।
ओबामा के हर सरकारी ऑर्डर को रद्द किया जाएगा। इसमें विवादास्पद रही ओबामा केयर पॉलिसी भी शामिल है। माना जा रहा है कि वह पाकिस्तान को मिलने वाली आर्थिक मदद को भी बंद कर देंगे, जो आतंकवाद के खिलाफ जंग के नाम पर दी जाती रही है। 
मुस्लिम विरोधी विवादास्पद बयान के कारण चर्चा में आए ट्रंप के सामने इस्लामिक कट्टरवाद से निपटना भी बड़ी चुनौती होगा। उनकी जीत की खबर सामने आने के बाद में अफगान तालिबान के प्रवक्ता ज़बीहुल्लाह मुजाहिद ने ट्रंप को संदेश दिया है कि अमेरिका को विकसित करने की नीति दूसरे देशों की आज़ादी छीनने वाली न हो।
मुजाहिद ने कहा कि दूसरे देशों की बर्बादी पर अपने राष्ट्रीय हित न देखे जाएं, ताकि दुनिया अमन के साथ रहे और मौजूदा जारी संकट खत्म हो। इसके साथ ही यह आशंका भी जाहिर की जा रही है कि वह रूस के साथ मिलकर चरमपंथी आतंकी संगठनों पर कड़ी कार्रवाई कर सकते हैं।
इसके साथ ही वह संयुक्त राष्ट्र के जलवायु परिवर्तन कार्यक्रम को दी जाने वाली अमेरिकी मदद पर भी रोक लगाएंगे। इन पैसों से वह अमेरिकी बुनियादी ढांचे का विकास करेंगे। 

क्या ट्रंप और पुतिन की करीबी से बदलेंगे रूस-अमेरिकी संबंध

शशांक शेखर बाजपेई। रिपब्लिकन उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप अमेरिकी राष्ट्रपति चुन लिए गए हैं, जो वैश्विक परिदृश्य को देखते हुए निःसंदेह एक बड़ी घटना है। मुस्लिम विरोधी ट्रंप की छवि दक्षिणपंथी नेता की है, जो आतंकवाद और कट्टरपंथ को मिटाने का मुद्दा लेकर चुनाव जीते हैं।

ट्रंप की जीत अमेरिकी राजनीति में कई बड़े बदलावों का संकेत दे रही है। दरअसल, पुतिन को डेमोक्रैटिक पार्टी से निजी परेशानी है कारण साल 2012 में जब वह राष्ट्रपति चुने गए थे, तो डेमोक्रैटिक पार्टी ने पूरे चुनाव को फर्जी करार दिया था।

वहीं, रूस पर यूरोपीय देशों के चुनाव में दखलअंदाजी करने का आरोप भी डेमोक्रेट्स पहले से लगाते रहे हैं। मौजूदा समय में सीरिया को लेकर भी अमेरिका-रूस के संबंधों में जबरदस्त तनाव है। वह रूस की हर कार्रवाई पर सवालिया निशान लगाता रहा है। इस बीच ट्रंप की जीत इस समीकरण को बदलेगी।

मोदी की तारीफ कई मौकों पर ट्रंप कर चुके हैं। उन्होंने अपने चुनाव अभियान में मोदी के जुमले 'अबकी बार ट्रंप सरकार' का इस्तेमाल किया था। मोदी के रूस के राष्ट्रपति पुतिन के साथ अच्छे संबंध हैं। रूस हमेशा से भारत के साथ खड़ा रहा है। आतंक के खिलाफ लड़ाई में भी रूस ने हमेशा भारत का साथ दिया है।

कुल मिलाकर देखा जाए तो तीनों विश्वशक्ति के नेताओं का आतंकवाद को लेकर एक जैसा ही नजरिया है। ऐसे में उम्मीद की जा सकती है कि आने वाले समय में चरमपंथ के खिलाफ तीनों देशों के नेता सशक्त कार्रवाई हो सकती है।