शशांक शेखर बाजपेई। रिपब्लिकन उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप अमेरिकी राष्ट्रपति चुन लिए गए हैं, जो वैश्विक परिदृश्य को देखते हुए निःसंदेह एक बड़ी घटना है। मुस्लिम विरोधी ट्रंप की छवि दक्षिणपंथी नेता की है, जो आतंकवाद और कट्टरपंथ को मिटाने का मुद्दा लेकर चुनाव जीते हैं। ट्रंप की जीत अमेरिकी राजनीति में कई बड़े बदलावों का संकेत दे रही है। दरअसल, पुतिन को डेमोक्रैटिक पार्टी से निजी परेशानी है कारण साल 2012 में जब वह राष्ट्रपति चुने गए थे, तो डेमोक्रैटिक पार्टी ने पूरे चुनाव को फर्जी करार दिया था।
वहीं, रूस पर यूरोपीय देशों के चुनाव में दखलअंदाजी करने का आरोप भी डेमोक्रेट्स पहले से लगाते रहे हैं। मौजूदा समय में सीरिया को लेकर भी अमेरिका-रूस के संबंधों में जबरदस्त तनाव है। वह रूस की हर कार्रवाई पर सवालिया निशान लगाता रहा है। इस बीच ट्रंप की जीत इस समीकरण को बदलेगी।
मोदी की तारीफ कई मौकों पर ट्रंप कर चुके हैं। उन्होंने अपने चुनाव अभियान में मोदी के जुमले 'अबकी बार ट्रंप सरकार' का इस्तेमाल किया था। मोदी के रूस के राष्ट्रपति पुतिन के साथ अच्छे संबंध हैं। रूस हमेशा से भारत के साथ खड़ा रहा है। आतंक के खिलाफ लड़ाई में भी रूस ने हमेशा भारत का साथ दिया है।
कुल मिलाकर देखा जाए तो तीनों विश्वशक्ति के नेताओं का आतंकवाद को लेकर एक जैसा ही नजरिया है। ऐसे में उम्मीद की जा सकती है कि आने वाले समय में चरमपंथ के खिलाफ तीनों देशों के नेता सशक्त कार्रवाई हो सकती है।
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