Thursday, May 24, 2018

25 मई से अगले नौ दिन रहें सावधान, झुलसा देगी सूर्य की गर्मी

शशांक शेखर बाजपेई। सूर्य के 25 मई को शाम 7.53 बजे रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश के साथ ही नौतपा शुरू हो जाएगा। नौतपा साल के वे 9 दिन होते हैं जब सूर्य पृथ्वी के सबसे निकट आ जाता है, जिस कारण भीषण गर्मी पड़ती है।

इस महीने में सूर्य के वृष राशि के 10 अंश से 23 अंश 40 कला तक नौतपा कहलाता है। इस दौरान तेज गर्मी रहने पर बारिश के अच्छे योग बनता है। वहीं, यदि रोहिणी के दौरान अगर बारिश होती है, तो इसे रोहिणी का गलना कहा जाता है।

मान्यता है कि यदि रोहिणी नक्षत्र में बारिश हो जाती है तो आने वाले बारिश के मौसम में वर्षा बहुत कम होती है।
जिस समय में सूर्य रोहिणी नक्षत्र में आते हैं, उस समय चंद्रमा नौ नक्षत्रों में भ्रमण करते हैं। यही कारण है कि इसे नौतपा कहा जाता है।

ऐसा माना जाता है कि सूर्य की गर्मी और रोहिणी के जल तत्व के कारण मॉनसून गर्भ में आ जाता है और नौतपा ही मानसून का गर्भकाल माना जाता है। दरअसल, रोहिणी नक्षत्र का अधिपति ग्रह चंद्रमा होता है। सूर्य तेज का और चंद्रमा शीतलता का प्रतीक होता है।

सूर्य जब चांद के नक्षत्र रोहिणी में प्रवेश करता है, तो सूर्य इस नक्षत्र को अपने प्रभाव में ले लेता है, जिसके कारण ताप बहुत अधिक बढ़ जाता है। इस दौरान ताप बढ़ जाने के कारण पृथ्वी पर आंधी और तूफान आने लगते हैं।   
इस बार आषाढ़ के दो महीने होंगे। पहला आषाढ़ 3 जून से 2 जुलाई तक और दूसरा आषाढ़ 3 जुलाई से 31 जुलाई तक रहेगा। शास्त्रों में कहा गया है कि आषाढ़ मास की अधिकता से खंडवृष्टि का योग बनता है। यानी रुक-रुक कर बारिश होती है।

इस बार 25 से 30 मई तक सूर्य, मंगल, बुध का शनि से समसप्तक योग होने से धरती खूब तपेगी। 30 मई को शुक्र के कर्क में जाने से गुरु-शुक्र का योग बनेगा, जो गर्मी के साथ-साथ कहीं-कहीं बादल वर्षा का भी कारक बनेगा। आर्द्रा नक्षत्र का प्रवेश 22 जून को और ग्रहों का योग वर्षा काल में अच्छी बारिश के संकेत दे रहा है।

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Wednesday, May 9, 2018

इन पांच दिनों में न करें कोई नया काम, शुरू हो गए हैं अग्नि पंचक

शशांक शेखर बाजपेई। पंचांग के अनुसार पंचक काल 08 मई 2018 को रात 09:00 बजे से प्रारंभ हो रहे हैं, जो 13 मई 2018 को दोपहर 01 बजकर 32 मिनट तक समाप्त होंगे। शास्त्रों में पंचक में किसी भी शुभ या नए कार्य को करने की सख्त मनाही है। इस काल में आपने कोई कार्य किया तो उसका फल प्राप्त नहीं होता है।

इस बार पंचक मंगलवार को शुरु होने के कारण इन्हें 'अग्नि पंचक' कहा जा रहा है। इन पांच दिनों में अग्नि से भय बना रहता है। शास्त्रों में पंचक के समय दक्षिण दिशा की यात्रा करना और लकड़ी का सामान खरीदना वर्जित बताया गया है। धनिष्ठा पंचकं त्याज्यं तृण काष्ठा-दि-संग्रहे। त्याज्या दक्षिण दिग्यात्रा गृहाणां छादनं तथा।।

पांच दिनों का यह समय, वर्ष में कई बार आता है। इसलिए कोई भी नया कार्य इन पांच दिनों में शुरू नहीं करना चाहिए। इसके लिए आप किसी जानकार ज्योतिषी से परामर्श लेना चाहिए। शास्त्रों में कहा गया है कि इन पांच नक्षत्रों की युति यानी गठजोड़ अशुभ होता है।

यू-ट्यूब लिंक- अग्नि पंचक हो रहे हैं शुरू, जानें किन बातों का रखें ध्यान 

पांच नक्षत्रों के संयोग को पंचक कहते हैं। 27 नक्षत्रों में अंतिम पांच नक्षत्र- धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती नक्षत्रों को पंचक कहा जाता है। ‘मुहूर्त चिंतामणि’ में उल्लेख है कि इन नक्षत्रों की युति में किसी की मृत्यु होने पर परिवार के अन्य सदस्यों को मृत्यु या मृत्यु तुल्य कष्ट का भय बना रहता है।

गरुण पुराण के अनुसार, पंचक के दौरान शव का अंतिम संस्कार करते समय किसी योग्य जानकार से पूछकर आटे या कुश के पांच पुतलों को भी अर्थी पर रखकर पूरे विधान के साथ अंतिम संस्कार करने से पंचक के दोष से मुक्ति मिलती है।

इन कामों को नहीं करना चाहिए 

1- पंचक के दौरान जिस समय घनिष्ठा नक्षत्र हो उस समय घास, लकड़ी आदि ईंधन एकत्रित नही करना चाहिए, इससे अग्नि का भय रहता है।

2- पंचक के दौरान दक्षिण दिशा में यात्रा नही करनी चाहिए, क्योंकि दक्षिण दिशा, यम की दिशा मानी गई है। इन नक्षत्रों में दक्षिण दिशा की यात्रा करना हानिकारक माना गया है।

3- पंचक के दौरान जब रेवती नक्षत्र चल रहा हो, उस समय घर की छत नहीं बनाना चाहिए, ऐसा विद्वानों का मत है। इससे धन हानि और घर में क्लेश होता है।

4- पंचक में चारपाई बनवाना भी अशुभ माना जाता है। विद्वानों के अ
नुसार ऐसा करने से कोई बड़ा संकट खड़ा हो सकता है।

5- पंचक में शव का अंतिम संस्कार नही करना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि पंचक में शव का अन्तिम संस्कार करने से उस कुटुंब में पांच मृत्यु और हो जाती है।

ये शुभ काम कर सकते हैं 


पंचक में आने वाले नक्षत्रों में शुभ कार्य हो सकते हैं। पंचक में आने वाला उत्तराभाद्रपद नक्षत्र वार के साथ मिलकर सर्वार्थसिद्धि योग बनाता है, वहीं धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद व रेवती नक्षत्र यात्रा, व्यापार, मुंडन आदि शुभ कार्यों में श्रेष्ठ माने गए हैं। इस दौरान सगाई, विवाह आदि शुभ कार्य भी किए जाते हैं।

Thursday, May 3, 2018

VIDEO : पीएम मोदी ने दिया राहुल गांधी को होम वर्क, जानें मामला

शशांक शेखर बाजपेई। मोक्षगुंडम विश्वेश्वरय्या का जन्म 15 सितम्बर 1861 - और निधन 14
अप्रैल 1962 को हुआ था। उनके नाम को लेकर भिड़े हैं राहुल गांधी और पीएम मोदी। मामला यहां तक बढ़ गया है कि पीएम मोदी ने राहुल गांधी को विश्वेश्वरय्या नाम अपने भाषण में पांच बार बोलने की चुनौती या कहें होम वर्क दे दिया है।
गुलामी के दौर में अपनी प्रतिभा से भारत के विकास में योगदान देने वाले सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया युगद्रष्टा इंजीनियर थे। बहुत कम लोगों को पता होगा कि हर साल 15 सितंबर को उनकी याद में ही इंजीनियर दिवस मनाया जाता है। जानते हैं उनके बारे में...

वीडियो देखें- राहुल गांधी को पीएम मोदी ने दी ऐसी चुनौती...

उनका एक किस्सा काफी दिलचस्प है। यह उस समय की बात है जब भारत में अंग्रेजों का शासन था। खचाखच भरी एक रेलगाड़ी चली जा रही थी। यात्रियों में अधिकतर अंग्रेज थे। एक डिब्बे में एक भारतीय मुसाफिर गंभीर मुद्रा में बैठा था।

सांवले रंग और मंझले कद का वह यात्री साधारण वेशभूषा में था इसलिए वहां बैठे अंग्रेज उसे मूर्ख और अनपढ़ समझ रहे थे और उसका मजाक उड़ा रहे थे। पर वह व्यक्ति किसी की बात पर ध्यान नहीं दे रहा था। अचानक उस व्यक्ति ने उठकर गाड़ी की जंजीर खींच दी।

तेज रफ्तार में दौड़ती वह गाड़ी तत्काल रुक गई। सभी यात्री उसे भला-बुरा कहने लगे। थोड़ी देर में गार्ड भी आ गया और उसने पूछा, ‘जंजीर किसने खींची है?’ उस व्यक्ति ने उत्तर दिया, ‘मैंने खींची है।’ कारण पूछने पर उसने बताया, ‘मेरा अनुमान है कि यहां से लगभग एक फर्लांग की दूरी पर रेल की पटरी उखड़ी हुई है।’

गार्ड ने पूछा, ‘आपको कैसे पता चला?’ वह बोला, ‘श्रीमान! मैंने अनुभव किया कि गाड़ी की स्वाभाविक गति में अंतर आ गया है। पटरी से गूंजने वाली आवाज की गति से मुझे खतरे का आभास हो रहा है।’ गार्ड उस व्यक्ति को साथ लेकर जब कुछ दूरी पर पहुंचा तो यह देखकर दंग रहा गया कि वास्तव में एक जगह से रेल की पटरी के जोड़ खुले हुए हैं और सब नट-बोल्ट अलग बिखरे पड़े हैं। दूसरे यात्री भी वहां आ पहुंचे।

जब लोगों को पता चला कि उस व्यक्ति की सूझबूझ के कारण उनकी जान बच गई है तो वे उसकी प्रशंसा करने लगे। गार्ड ने पूछा, ‘आप कौन हैं?’ उस व्यक्ति ने कहा, ‘मैं एक इंजीनियर हूं और मेरा नाम है डॉ॰ एम. विश्वेश्वरैया।’ नाम सुन सब स्तब्ध रह गए। दरअसल उस समय तक देश में डॉ॰ विश्वेश्वरैया की ख्याति फैल चुकी थी। लोग उनसे क्षमा मांगने लगे। डॉ॰ विश्वेश्वरैया का उत्तर था, ‘आप सब ने मुझे जो कुछ भी कहा होगा, मुझे तो बिल्कुल याद नहीं है।’

चिर यौवन का रहस्य- भारत-रत्न से सम्मानित विश्वेश्वरैया ने सौ वर्ष से अधिक की आयु पाई और अंत तक सक्रिय जीवन व्यतीत किया। एक बार एक व्यक्ति ने उनसे पूछा, 'आपके चिर यौवन का रहस्य क्या है?' डॉ॰ विश्वेश्वरैया ने उत्तर दिया, 'जब बुढ़ापा मेरा दरवाजा खटखटाता है, तो मैं भीतर से जवाब देता हूं कि विश्वेश्वरैया घर पर नहीं है और वह निराश होकर लौट जाता है। बुढ़ापे से मेरी मुलाकात ही नहीं हो पाती तो वह मुझ पर हावी कैसे हो सकता है?'

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Tuesday, May 1, 2018

मांगलिक होना दोष या योग, जानें क्या है सही

शशांक शेखर बाजपेई। आमतौर पर यही सुनने को मिलता है कि मांगलिक होना शुभ नहीं है। कम से कम लड़कियों के मामले में जरूर यही कहा जाता है। बहुत से तथाकथित ज्ञानी ज्योतिषों ने यह दुष्प्रचार कर रखा है कि मांगलिक होना खराब है। मगर, क्या आप जानते हैं कि मांगलिक होने से होता क्या है? मंगल ग्रह करता क्या है? जातक मांगलिक कैसे होता है? क्या मांगलिक होना दोष है या मांगलिक होना योग है? 

दरअसल, यह एक तर्कसंगत ग्रह है। लग्न, चौथे भाव, सातवें भाव, आठवें भाव और बारहवें भाव में मंगल ग्रह होने पर जातक मांगलिक होता है। इसकी शुक्र के साथ युति होने से व्यक्ति गतिणतज्ञ बनता है। कड़े निर्णय लेता है। मांगलिक व्यक्ति प्रेम भी करेगा, तो तर्क के साथ। उसके प्रेम में दो और दो चार होगें, चाहें परिस्थितियां कैसी भी हों। अन्य प्रेमी परिस्थितियों के अधीन दो और दो का जोड़ तीन या पांच भी कर सकते हैं।

बात करते हैं विवाह की। वर में मांगलिक दोष हो तो चल जाता है, लेकिन कन्या में मांगलिक दोष वैवाहिक जीवन को खराब कर देता है। मांगलिक लड़की की एक गैर मांगलिक लड़के साथ शादी हो, तो कन्या वर पर दबाव बनाए रखेगी। यानी सीधे शब्दों में कहा जाए तो वर पर हावी रहेगी। ऐसा में यदि वर संवेदनशील है तो वैवाहिक जीवन में व्यवधान तो होंगे ही। वहीं, वर के मांगलिक होने और कन्या मांगलिक न हो तो वर-वधु पर हावी रहेगा। ऐसा अपने भारतीय समाज में ठीक भी माना जाता है।

मंगल ग्रह यदि आठवें या बारहवें भाव में हो तो ऐसा होना खराब होता है। हालांकि, कुछ विशेष परिस्थितियों में या शुभ ग्रहों की युति से कुछ अच्छे परिणाम भी दे सकता है। लग्न में मंगल जातक के व्यक्तित्व को बहुत तीक्ष्ण बना देता है। वहीं, चौथे भाव में मंगल जातक को कड़ी पारिवारिक पृष्ठभूमि देता है। सातवें स्थान का मंगल जातक को साथी या सहयोगी के प्रति कठोर बनाता है। 

आठवें और बारहवें स्थान का मंगल आयु और शारीरिक क्षमताओं को प्रभावित करता है। इन स्थानों पर बैठा मंगल यदि अच्छे प्रभाव में है तो जातक के व्यवहार में मंगल के अच्छे गुण आएंगे और खराब प्रभाव होने पर खराब गुण आएंगे। 

जैसे मंगल की शुभ ग्रहों के साथ युति जातक को सेना, पुलिस आदि में उच्च पदों पर ले जाती है। वहीं अशुभ ग्रहों की स्थिति चोर, डाकू या आतंकवादी बना सकती है। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि उच्चपदस्य सैन्य अधिकारी और कुख्यात आतंकवादी दोनों की कुंडली में मंगल ग्रह का जबरदस्त प्रभाव होगा।

मांगलिक व्यक्ति कठोर निर्णय लेने वाला, कठोर वचन बोलने वाला, लगातार काम करने वाला, विपरीत लिंग के प्रति कम आकर्षित होने वाला, योजनाबद्ध काम करने वाला, कठोर अनुशासन वाला, नए अनजाने कामों को शीघ्रता से हाथ में लेने वाला और लड़ाई को तत्पर रहता है। इसके चलते गैर मांगलिक जातक इनके साथ अधिक समय तक नहीं रह पाते।