शशांक शेखर बाजपेई। सूर्य के 25 मई को शाम 7.53 बजे रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश के साथ ही नौतपा शुरू हो जाएगा। नौतपा साल के वे 9 दिन होते हैं जब सूर्य पृथ्वी के सबसे निकट आ जाता है, जिस कारण भीषण गर्मी पड़ती है।

इस महीने में सूर्य के वृष राशि के 10 अंश से 23 अंश 40 कला तक नौतपा कहलाता है। इस दौरान तेज गर्मी रहने पर बारिश के अच्छे योग बनता है। वहीं, यदि रोहिणी के दौरान अगर बारिश होती है, तो इसे रोहिणी का गलना कहा जाता है।
मान्यता है कि यदि रोहिणी नक्षत्र में बारिश हो जाती है तो आने वाले बारिश के मौसम में वर्षा बहुत कम होती है।
जिस समय में सूर्य रोहिणी नक्षत्र में आते हैं, उस समय चंद्रमा नौ नक्षत्रों में भ्रमण करते हैं। यही कारण है कि इसे नौतपा कहा जाता है।
ऐसा माना जाता है कि सूर्य की गर्मी और रोहिणी के जल तत्व के कारण मॉनसून गर्भ में आ जाता है और नौतपा ही मानसून का गर्भकाल माना जाता है। दरअसल, रोहिणी नक्षत्र का अधिपति ग्रह चंद्रमा होता है। सूर्य तेज का और चंद्रमा शीतलता का प्रतीक होता है।
सूर्य जब चांद के नक्षत्र रोहिणी में प्रवेश करता है, तो सूर्य इस नक्षत्र को अपने प्रभाव में ले लेता है, जिसके कारण ताप बहुत अधिक बढ़ जाता है। इस दौरान ताप बढ़ जाने के कारण पृथ्वी पर आंधी और तूफान आने लगते हैं।
इस बार आषाढ़ के दो महीने होंगे। पहला आषाढ़ 3 जून से 2 जुलाई तक और दूसरा आषाढ़ 3 जुलाई से 31 जुलाई तक रहेगा। शास्त्रों में कहा गया है कि आषाढ़ मास की अधिकता से खंडवृष्टि का योग बनता है। यानी रुक-रुक कर बारिश होती है।
इस बार 25 से 30 मई तक सूर्य, मंगल, बुध का शनि से समसप्तक योग होने से धरती खूब तपेगी। 30 मई को शुक्र के कर्क में जाने से गुरु-शुक्र का योग बनेगा, जो गर्मी के साथ-साथ कहीं-कहीं बादल वर्षा का भी कारक बनेगा। आर्द्रा नक्षत्र का प्रवेश 22 जून को और ग्रहों का योग वर्षा काल में अच्छी बारिश के संकेत दे रहा है।
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इस महीने में सूर्य के वृष राशि के 10 अंश से 23 अंश 40 कला तक नौतपा कहलाता है। इस दौरान तेज गर्मी रहने पर बारिश के अच्छे योग बनता है। वहीं, यदि रोहिणी के दौरान अगर बारिश होती है, तो इसे रोहिणी का गलना कहा जाता है।
मान्यता है कि यदि रोहिणी नक्षत्र में बारिश हो जाती है तो आने वाले बारिश के मौसम में वर्षा बहुत कम होती है।
जिस समय में सूर्य रोहिणी नक्षत्र में आते हैं, उस समय चंद्रमा नौ नक्षत्रों में भ्रमण करते हैं। यही कारण है कि इसे नौतपा कहा जाता है।
ऐसा माना जाता है कि सूर्य की गर्मी और रोहिणी के जल तत्व के कारण मॉनसून गर्भ में आ जाता है और नौतपा ही मानसून का गर्भकाल माना जाता है। दरअसल, रोहिणी नक्षत्र का अधिपति ग्रह चंद्रमा होता है। सूर्य तेज का और चंद्रमा शीतलता का प्रतीक होता है।
सूर्य जब चांद के नक्षत्र रोहिणी में प्रवेश करता है, तो सूर्य इस नक्षत्र को अपने प्रभाव में ले लेता है, जिसके कारण ताप बहुत अधिक बढ़ जाता है। इस दौरान ताप बढ़ जाने के कारण पृथ्वी पर आंधी और तूफान आने लगते हैं।
इस बार आषाढ़ के दो महीने होंगे। पहला आषाढ़ 3 जून से 2 जुलाई तक और दूसरा आषाढ़ 3 जुलाई से 31 जुलाई तक रहेगा। शास्त्रों में कहा गया है कि आषाढ़ मास की अधिकता से खंडवृष्टि का योग बनता है। यानी रुक-रुक कर बारिश होती है।
इस बार 25 से 30 मई तक सूर्य, मंगल, बुध का शनि से समसप्तक योग होने से धरती खूब तपेगी। 30 मई को शुक्र के कर्क में जाने से गुरु-शुक्र का योग बनेगा, जो गर्मी के साथ-साथ कहीं-कहीं बादल वर्षा का भी कारक बनेगा। आर्द्रा नक्षत्र का प्रवेश 22 जून को और ग्रहों का योग वर्षा काल में अच्छी बारिश के संकेत दे रहा है।
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