शशांक शेखर बाजपेई। पंचांग के अनुसार पंचक काल 08 मई 2018 को रात 09:00 बजे से प्रारंभ हो रहे हैं, जो 13 मई 2018 को दोपहर 01 बजकर 32 मिनट तक समाप्त होंगे। शास्त्रों में पंचक में किसी भी शुभ या नए कार्य को करने की सख्त मनाही है। इस काल में आपने कोई कार्य किया तो उसका फल प्राप्त नहीं होता है।इस बार पंचक मंगलवार को शुरु होने के कारण इन्हें 'अग्नि पंचक' कहा जा रहा है। इन पांच दिनों में अग्नि से भय बना रहता है। शास्त्रों में पंचक के समय दक्षिण दिशा की यात्रा करना और लकड़ी का सामान खरीदना वर्जित बताया गया है। धनिष्ठा पंचकं त्याज्यं तृण काष्ठा-दि-संग्रहे। त्याज्या दक्षिण दिग्यात्रा गृहाणां छादनं तथा।।
पांच दिनों का यह समय, वर्ष में कई बार आता है। इसलिए कोई भी नया कार्य इन पांच दिनों में शुरू नहीं करना चाहिए। इसके लिए आप किसी जानकार ज्योतिषी से परामर्श लेना चाहिए। शास्त्रों में कहा गया है कि इन पांच नक्षत्रों की युति यानी गठजोड़ अशुभ होता है।
यू-ट्यूब लिंक- अग्नि पंचक हो रहे हैं शुरू, जानें किन बातों का रखें ध्यान
पांच नक्षत्रों के संयोग को पंचक कहते हैं। 27 नक्षत्रों में अंतिम पांच नक्षत्र- धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती नक्षत्रों को पंचक कहा जाता है। ‘मुहूर्त चिंतामणि’ में उल्लेख है कि इन नक्षत्रों की युति में किसी की मृत्यु होने पर परिवार के अन्य सदस्यों को मृत्यु या मृत्यु तुल्य कष्ट का भय बना रहता है।
गरुण पुराण के अनुसार, पंचक के दौरान शव का अंतिम संस्कार करते समय किसी योग्य जानकार से पूछकर आटे या कुश के पांच पुतलों को भी अर्थी पर रखकर पूरे विधान के साथ अंतिम संस्कार करने से पंचक के दोष से मुक्ति मिलती है।
इन कामों को नहीं करना चाहिए
1- पंचक के दौरान जिस समय घनिष्ठा नक्षत्र हो उस समय घास, लकड़ी आदि ईंधन एकत्रित नही करना चाहिए, इससे अग्नि का भय रहता है।
2- पंचक के दौरान दक्षिण दिशा में यात्रा नही करनी चाहिए, क्योंकि दक्षिण दिशा, यम की दिशा मानी गई है। इन नक्षत्रों में दक्षिण दिशा की यात्रा करना हानिकारक माना गया है।
3- पंचक के दौरान जब रेवती नक्षत्र चल रहा हो, उस समय घर की छत नहीं बनाना चाहिए, ऐसा विद्वानों का मत है। इससे धन हानि और घर में क्लेश होता है।
4- पंचक में चारपाई बनवाना भी अशुभ माना जाता है। विद्वानों के अ
नुसार ऐसा करने से कोई बड़ा संकट खड़ा हो सकता है।
5- पंचक में शव का अंतिम संस्कार नही करना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि पंचक में शव का अन्तिम संस्कार करने से उस कुटुंब में पांच मृत्यु और हो जाती है।
ये शुभ काम कर सकते हैं
पंचक में आने वाले नक्षत्रों में शुभ कार्य हो सकते हैं। पंचक में आने वाला उत्तराभाद्रपद नक्षत्र वार के साथ मिलकर सर्वार्थसिद्धि योग बनाता है, वहीं धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद व रेवती नक्षत्र यात्रा, व्यापार, मुंडन आदि शुभ कार्यों में श्रेष्ठ माने गए हैं। इस दौरान सगाई, विवाह आदि शुभ कार्य भी किए जाते हैं।
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