Saturday, July 25, 2015

मानसून सत्र में काम नहीं हुआ, तो बर्बाद होंगे 260 करोड़


शशांक शेखर बाजपेई।
नई दिल्‍ली। संसद में मानसून सत्र शुरू हुए चार दिन पूरे हो चुके हैं। मगर, अभी तक एक भी काम नहीं हो पाया है। यदि विपक्ष इसी तरह अपनी मांगों को लेकर अड़ा रहा, और संसद की कार्रवाई नहीं हो पाई, तो करदाताओं के 260 करोड़ रुपए की बर्बादी होगी। लोकसभा की कार्रवाई के संचालन में 162 करोड़ और राज्‍य सभा की कार्रवाई में 98 करोड़ रुपए का खर्च हो रहा है।

मानसून सत्र का पहला हफ्ता तो बेकार ही चला गया। संसद ने अपने तय समय में से 91 फीसद समय काम ही नहीं किया। लोकसभा में एक घंटे की कार्रवाई पर 1.5 करोड़ रुपए और राज्‍यसभा में एक घंटे की कार्रवाई पर 1.1 करोड़ रुपए का खर्च आता है।

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मानसून सत्र की शुरूआत में नरेंद्र मोदी ने उम्‍मीद जताई थी कि पिछले सत्र में जो काम अधूरे रह गए थे, वे इस सत्र में पूरे हो जाएंगे। इस सत्र के एजेंडे में 11 लंबित बिलों को पारित कराना और नौ नए बिलों को पेश करना था। इसके अलावा एक बिल को विचार के लिए लाना था। लोकसभा में भूमि अधिग्रहण बिल, एससी और एसटी (अत्‍याचार निवारण) संसोधन विधेयक 20
14 पेश किया जाना था।

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वहीं, राज्‍य सभा में विसिलब्‍लोअर प्रोटेक्‍शन (संशोधन) बिल 2015,, मेंटल हेल्‍थ केयर बिल 2013, भ्रष्‍टाचार रोकथाम (संसोधन) बिल 2013, बाल श्रम संसोधन बिल 2012, रियल एस्‍टेट (रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट) बिल 2013, जुवेनाइल जस्टिस अमेंडमेंट बिल 2015, संविधान के 122वें संशोधन बिल 2014 पर काम होना है। इसके अलावा रेलवे को अधिक अनुदान देने की मांग पर चर्चा और मतदान भी होना है। 

संसद के सत्र के बीच सांसद ने कराया स्‍तनपान, तस्‍वीर हुई वायरल

ब्‍यूनेस आयर्स। विक्‍टोरिया डोंडा पीरेज ने अपनी आठ महीने की बेटी को संसद के सत्र के बीच स्‍तनपान कराना शुरू कर दिया। मामला इस महीने की शुरुआत का है। वह उस वक्‍त अर्जेन्‍टीना नेशनल कांग्रेस की बैठक में हिस्‍सा ले रही थीं। उनकी यह तस्‍वीर इंटरनेट पर वायरल हो गई है।

मानवाधिकार कार्यकर्ता और पेशे से वकील पीरेज दिसंबर 2007 में अर्जेन्‍टीना नेशनल कांग्रेस की सबसे युवा सदस्‍य बनीं थीं। तब से ग्‍लैमरस 37 वर्षीय पीरेज का निक नाम 'डिपूसेक्‍स' या सेक्‍सी एमपी पड़ गया। हालांकि, बेटी को स्‍तनपान कराने के उनके फैसले को लेकर ऑनलाइन कम्‍युनिटी दो हिस्‍सों में बंट गई है।

कुछ लोगों का मानना है कि पीरेज के इस कदम के बाद वह फेमिनिस्‍ट आईकन बन गई हैं। वहीं, अन्‍य लोगों का मानना है कि सार्वजनिक रूप से ऐसा करना ठीक नहीं है। जुआना नाम की एक महिला ने ट्विटर पर लिखा कि मैं पीरेज के इस कदम की प्रशंसा करती हूं क्‍योंकि कई माएं अपने बच्‍चों को नर्सरी में छोड़ देती हैं, जबकि छोटे बच्‍चों के लिए स्‍तनपान से अच्‍छा कोई दूसरा भोजन नहीं है। जब आपका बच्‍चा रोता है, तो आप बस यही चाहते हैं कि वह चुप हो जाए।

वहीं, एक अन्‍य यूजर ने लिखा कि स्‍तनपान कराने के दौरान उन्‍हें स्‍पेशल ब्रा से अपने स्‍तनों को ढंक लेना चाहिए था। अपने स्‍तनों को दिखाकर आस-पास के लोगों को दिखाना ठीक नहीं था। वहीं इस बात के भी कयास लगाए जा रहे हैं कि क्‍या सांसद पूर्णकालिक मां की भूमिका के महत्‍व को पूरा करने का उदाहरण पेश करना चाहती थीं। ये तस्‍वीरें पेरू21 न्‍यूजपेपर में प्रकाशित हुईं थीं। 

यौन शोषण करने वाले आरके पचौरी को पीडि़ता का खुला पत्र

महिला वर्कर से यौन शोषण के आरोप में घिरे आरके पचौरी को टेरी चीफ के पद से हटा दिया गया है। यह खुला पत्र उस लड़की ने लिखा है,‍ जिसका पचौरी ने यौन उत्‍पीड़न किया था। पढि़ए उस मजबूर लड़की ने क्‍या लिखा.....

हममें से कई लोगों के लिए एनर्जी एंड रिसोर्स इंस्‍टीट्यूट में एक ब्रेक पाना किसी सपने के सच होने जैसा है। मैं उस काम को करने जा रही थी, जो मेरे दिल के काफी करीब है और उस व्‍यक्‍ित के साथ करने जा रही थी, जिसकी इस विषय में वैश्विक पहचान है। यह बड़े गर्व की बात थी कि वह व्यक्ति भारतीय था और दूसरे लोग जो विदेश में बसने चले जाते हैं उनके विपरीत उसने रहने के लिए दिल्ली को चुना था। मैं उससे मिलने को व्‍याकुल थी।

मगर, जल्‍द ही मेरे जुनून और गर्व में दरारें पड़ना शुरू हो गईं, जो आने वाले महीनों में इतनी गहरी हो गईं कि मैं खुद को टूटा हुआ और असहाय महसूस करने लगी। हम सभी अपनी जिंदगी में तनाव महसूस करते हैं, लेकिन यह अप्रत्‍याशित था। मेरे जैसे किसी के लिए, जिसने काफी दुनिया घूमी है और सभी तरह के इंसानों से मिली हो। मैं अपने बुरे सपने में भी नहीं सोच सकती कि जिससे मिलने के लिए मैं इतनी उत्‍सुक थी, वह इस तरह का निकलेगा।

मैं मानसिक रूप से थकी हुई घर लौटती थी और खालीपन महसूस करती थी, जैसे किसी ने मेरे आंतरिक अंगों को काटकर बाहर फेंक दिया गया है। दुर्भाग्‍य से कानूनों के तहत उस पर सिर्फ यौन उत्पीड़न का मुकदमा चलाया जा सकता है। मानसिक यातना के लिए नहीं।

मैं आगे बढ़ी और 13 फरवरी 2015 को पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। मगर, प्रेस में मामला आने के पांच दिनों बाद एफआईआर दर्ज हो सकी। मैं खुशकिस्‍मत समझती हूं कि मेरा परिवार मेरे साथ खड़ा है। मेरे पापा के शब्‍द थे - अपराध में चुप बैठना अपराध के एक हिस्‍से की शुरुआत है।

मैंने संस्‍थान के वार्षिक कार्यक्रम का इंतजार किया और उत्‍पीड़न का यह मामला टेरी की इंटरनल कम्‍प्‍लेंट्स कमेटी (आईसीसी) में 9 फरवरी को दर्ज कराया। मुझे सुरक्षित महसूस करना था। मगर, हकीकत जुदा थी। एचआर प्रमुख ने पूछा मैं चुप क्‍यों नहीं रहती। मुझे बताया गया कि यदि ऐसी शिकायत सार्वजनिक हो गई, तो मेरी प्रतिष्‍ठा पर सवाल उठेंगे।

उत्‍पीड़न एक खुला रहस्‍य था और संगठन में काम करने वाले अन्‍य लोग भी इसके गवाह थे। मगर, कोई भी नहीं बोला। आईसीसी के सामने कुछ चुनिंदा लोगों ने ही मेरे बयान का समर्थन किया। टेरी की ओर से कोई भी मुझे सांत्‍वना देने नहीं आया। मुझे निजी वकील करना पड़ा, जबकि यह संगठन की जिम्‍मेदारी थी कि वह मुझे वकील मुहैया कराता।

सत्‍ता, रसूख और पैसे का खेल जल्‍द ही खुल गया। कोर्ट के कई आवेदनों और वरिष्‍ठ वकीलों के साथ दिन के 24 घंटे का समय कम लगने लगा था। इसमें वकीलों के साथ मुलाकात, कागजी कार्यवाही, आगे की जिंदगी की प्‍लानिंग, बीमारी से उबरना यह सब मेरे दिनों में साथ-साथ चल रहे थे।

अमीर और प्रसिद्ध लोगों पर अलग नियम लागू होते हैं। मेरे पास पीआर फर्म करने के लिए पैसे नहीं थे, जबकि दूसरी तरफ से तीन पीआर फर्म बदली गईं। तटस्‍थ होने का नया अर्थ पता चला। संगठन के लिए इसका अर्थ था डायरेक्‍टर जनरल का पक्ष लेना। इसका अर्थ था आईसीसी को भयभीत करना।

कुछ कर्मचारी आईसीसी की रिपोर्ट पूरी करने से पहले उसके सदस्‍यों के घर देर रात जाते थे। गवर्निंग काउंसिल के लिए इसका अर्थ था संज्ञान में नहीं लेना, अकेले प्रतिक्रिया देते रहना (3 अप्रैल 2015 को लिखे मेरे दुखी पत्र के बारे में)। इसका अर्थ था मेरे चरित्र पर टिप्‍पणी करना।

इसका अर्थ था पुलिस जांच में सहयोग नहीं करना। इसका अर्थ था मुझे मेरा वेतन नहीं देना। इसका अर्थ था दोषी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करना। इसका अर्थ था उनका फूलों और मालाओं से स्‍वागत करना। आखिरकार, डायरेक्‍टर जनरल को हटाने का बहुप्रतीक्षित फैसला सुनाया गया।

सच में? आश्‍चर्य की बात यह है कि टेरी की ओर से जारी की गई प्रेस रिलीज वही थी, जो डायरेक्‍टर जनरल की पीआर फर्म ने इससे पहले जारी की थी। फर्म टेरी की ओर से काम कर रही थी या डीजी की ओर से? इसने मुझे चौंका दिया कि डीजी के रिप्‍लेसमेंट का मेरी शिकायत से कोई लेना देना था? उस कार्रवाई का क्‍या हुआ, जो मेरी शिकायत पर की जानी थी? सजा कहां हुई? मुझे तोड़ने के प्रयासों के बीच लड़ाई जारी है। यह मेरी दृढ़ता को नहीं तोड़ सकती। 

Saturday, July 18, 2015

नेल्‍सन मंडेला : अफ्रीका का 'महात्‍मा'

शशांक शेखर बाजपेई।  
नवम्बर 2009 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने रंगभेद विरोधी संघर्ष में दक्षिण अफ्रीका के पूर्व राष्‍ट्रपति नेल्‍सन मंडेला के योगदान को देखते हुए उनके सम्मान में उनके जन्मदिन (18 जुलाई) को 'मंडेला दिवस' घोषित किया। 

वो ऐसी शख्सियत थे, जिनका जन्मदिन अंर्तराष्ट्रीय दिवस के रूप में उनके जीवन काल में ही मनाया जाने लगा था। नेल्सन मंडेला दक्षिण अफ्रीका के प्रथम अश्वेत राष्ट्रपति थे। मंडेला 10 मई 1994 को दक्षिण अफ्रीका के प्रथम अश्वेत राष्ट्रपति बने। 

संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने कहा था कि, मंडेला संयुक्त राष्ट्र के उच्च आर्दशों के प्रतीक हैं। दक्षिण अफ्रीका में सदियों से चल रहे रंगभेद का विरोध करने वाले अफ्रीकी नेशनल कांग्रेस और इसके सशस्त्र गुट उमखोंतो वे सिजवे के वह अध्यक्ष रहे। रंगभेद विरोधी संघर्ष के कारण उन्होंने 27 साल के लिए रॉबेन द्वीप के कारागार में डाल दिया गया, जहां उन्‍हें कोयला खनिक का काम करना पड़ा।

वर्ष 1990 में श्वेत सरकार से हुए एक समझौते के बाद उन्होंने नए दक्षिण अफ्रीका का निर्माण किया। इसी वर्ष यानी 1990 में भारत ने उन्हें भारत के सर्वोच्च पुरस्कार 'भारत रत्न' से सम्मानित किया। मंडेला, भारत रत्न पाने वाले पहले विदेशी हैं। वर्ष 1993 में नेल्सन मंडेला और डी क्लार्क दोनों को संयुक्त रूप से शान्ति के लिए नोबेल पुरस्कार दिया गया।वे दक्षिण अफ्रीका के साथ-साथ पूरी दुनिया में रंगभेद का विरोध करने के प्रतीक बन गए।

उन यातनाओं ने बनाया क्रांतिकारी

विद्यार्थी जीवन में उन्हें रोज याद दिलाया जाता कि उनका रंग काला है और सिर्फ इसी वजह से वह यह काम नहीं कर सकते। उन्हें इस बात का एहसास करवाया जाता कि अगर वे सीना तान कर सड़क पर चलेंगे, तो इस अपराध के लिए उन्हें जेल जाना पड़ सकता है। ऐसे अन्याय ने उनके अन्दर असंन्तोष भर दिया और एक क्रान्तिकारी तैयार हो रहा था।

अफ्रीका के गांधी पर गांधीजी का प्रभाव

पूरी दुनिया महात्‍मा गांधी के विचार काल और सीमाओं से परे हैं। उनसे प्रभावित लोगों में नेल्सन भी थे। वैचारिक रूप से वह स्वयं को गांधी के करीब पाते थे, और यह प्रभाव उनके द्वारा चलाए गए आन्दोलनों पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा था।

नेल्सन मंडेला ने गांधीवादी विचारों से प्रेरणा लेकर रंगभेद के खिलाफ अपने संघर्ष की शुरुआत की और दक्षिण अफ्रीका के दूसरे गांधी बन गए। मंडेला ने अन्याय के विरुद्ध क्रोध को रचनात्मक रूप दिया। अहिंसा का सशक्त रास्ता ढूंढा और उससे अफ्रीका की आजादी के आंदोलन के साथ साथ व्यक्‍ितगत तौर पर भी लोगों में अहिंसक धारा की बात मन में जुड़ी।

मैं काली और गोरी हुकूमत के खिलाफ हूं

सन् 1984 में मडेला ने रिवियोना ट्रायल के समय साढे़ चार घंटे की स्पीच दी। उन्‍होंने भाषण के आखिर में कहा - मैं काली हुकूमत के खिलाफ लड़ा हूं और मैं गोरी हुकूमत के खिलाफ लड़ा हूं। मैंने हमेशा एक ऐसे लोकतांत्रिक देश के आदर्श को पोषित किया है जहां मुक्‍त समाज हो, जिसमें सभी लोग सौहार्द और समान हक के साथ रहते हों। यह एक ऐसा आदर्श है, मैं जिसके लिए जीना और जिसे हासिल करना चाहूंगा। पर अगर जरूरत पड़ी तो मैं इसके लिए मरने के लिए भी तैयार रहूंगा।

सम्मान में झुकी दुनिया

लंबी बीमारी के बाद मंडेला का 5 दिसंबर 2013 में निधन हो गया था। दुनिया में उनके सम्‍मान का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि भारतीय राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा सहित दुनिया के करीब 100 नेताओं ने मंडेला को श्रद्धांजलि देते हुए 'इतिहास का पुरोधा' करार दिया। 

प्रणब मुखर्जी, बराक ओबामा, संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की-मून और अफ्रीकी संघ आयोग की अध्यक्ष कोसाजाना डलामिनी जुमा सहित 53 से अधिक देशों के राष्ट्राध्यक्ष व शासनाध्यक्ष 95 हजार सीटों की क्षमता वाले एफएनबी स्टेडियम में आयोजित दो घंटे की शोकसभा में शामिल हुए थे।

नेल्सन मंडेला के कथन 
  • बड़े गर्व की बात कभी न गिरने में नहीं, बल्कि हर बार गिर कर उठने में है।
  • हर व्यक्ति के लिए रोटी, कपड़ा और मकान के साथ काम भी होना चाहिए।
  • छोटा काम करना या छोटी सोच वालों के साथ रहने से कोई फायदा नहीं है। आप जिस तरह का जीवन व्यतीत कर सकते हैं, उससे कम स्तर की जिंदगी जीना गलत है।
  • पीछे रहकर नेतृत्व करना और टीम को आगे करना सबसे अच्छा तरीका है। खासतौर पर तब जब जीत की खुशियां मनाई जाएं। तभी आगे आएं, जब खतरा दिखे या टीम गलत राह में जाती हुई दिखे। इससे दूसरों की नजरों में आपकी इज्‍जत बढ़ जाएगी।
  • मेरे देश में लोग पहले जेल जाते हैं और फिर राष्ट्रपति बन जाते हैं।
  • यदि आप किसी व्यक्ति से उस भाषा में बात करें जो वो समझता है, तो बात उसके सर में जाती है। यदि आप उससे उसकी भाषा में बात करते हैं, तो बात उसके दिल तक जाती है।
  • शिक्षा सबसे मत्वपूर्ण हथियार है क्योंकि इसी से ही दुनिया बदली जा सकती है।
  • मैं जातिवाद से घृणा करता हूं, मुझे यह बर्बरता लगती है। फिर चाहे वह अश्‍वेत व्यक्‍ित से आ रही हो या श्‍वेत व्यक्‍ित से।
  • शत्रु के साथ आपको शांति अगर चाहिए, तो आपको अपने शत्रु के साथ काम करना होगा। फिर वह आपका साथी बन जाएगा।
  • एक अच्छा दिमाग और एक अच्छा दिल हमेशा से विजयी जोड़ी रहे हैं।
  • एक बड़े पहाड़ पर चढ़ने के बाद यही पता चलता है कि अभी ऐसे कई पहाड़ चढ़ने के लिए बाकी हैं।
  • दूसरों के काम और जिंदगी में तभी दखल दीजिए जब वे लोग शांति पसंद करते हों।
  • लोगों को काम के लिए प्रोत्साहित करना और अहसास कराना की ये उन्हीं का सुझाव था, ये सबसे समझदारी की बात है।
  • जब पानी उबलने लगे तो आंच धीमी करने से कोई फायदा नहीं होगा। यानी जब समस्या बढ़ जाए तो उसे शांत करने से अच्छे नतीजे नहीं मिलेंगे।
  • आजाद होने के लिए पूरी दुनिया में कोई भी आसान रास्ता नहीं है।
  • जीवन में कभी न गिरना उसकी सुंदरता नहीं है, लेकिन गिरकर उठना और अपने सपनों को हासिल करना जिंदगी की खूबसूरती है।
  • जब तक काम कर न लिया जाए, तब तक वह काम असंभव लगता है।

Thursday, July 2, 2015

आठ तरह के नोटिस जारी करता है इंटरपोल

शशांक शेखर बाजपेई। 
shashank shekhar 

आईपीएल के पूर्व कमिश्नर ललित मोदी को ब्रिटेन से वापस लाने की कवायद भी शुरू हो गई है। लेकिन यह काम इतना आसान नहीं है। ललित मोदी को प्रत्यर्पित कर भारत लाने में छह महीने से अधिक का समय लग सकता है। यह कहना है प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) का।

इस बारे में ईडी सूत्रों का कहना है कि अभी ललित मोदी के खिलाफ अदालतों में मामले चल रहे हैं। सुनवाई पूरी हुए बिना उनके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी नहीं किया जा सकता। ललित मोदी के खिलाफ फेमा के 16 मामले दर्ज हैं। जानते हैं क्‍या है इंटरपोल और कितने तरह के नोटिस वह जारी करता है। 

क्‍या है इंटरपोल

इंटरपोल नोटिस सूचना के आदान-प्रदान की पद्धति है। दुनियाभर की कई देशों की पुलिस इस संगठन से जुड़ी है। इसके तहत कोई सदस्‍य देश अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर पर सहयोग या सचेत करने का आवेदन करता है। नेशनल सेंट्रल ब्‍यूरो के आग्रह पर इंटरपोल का जनरल सेक्रेट्रिएट नोटिस जारी करता है। इसके बाद आधिकृत संस्‍थाएं इस सूचना को संगठन की आधिकारिक भाषाओं अरबी, अंग्रेजी, फ्रेंच और स्‍पेनिश में प्रकाशित करता है।


इंटरपोल आठ प्रकार के नोटिस जारी करता है, जो अपने रंगों से पहचाने जाते हैं। ये रंग हैं लाल, नीला, हल्‍का नीला, हरा, पीला, काला, नारंगी और बैंगनी। लाल नोटिस आमतौर पर किसी अपराधी की गिरफ्तारी और उसके प्रत्‍यपर्ण के लिए होता है। नीला नोटिस किसी व्यक्ति के बारे में अतिरिक्त सूचना देने या पाने के लिए जारी किया जाता है।

हरा नोटिस ऐसे व्यक्तियों के बारे में चेतावनी जो अपराध कर चुके हैं, और जिनके बारे में आशंका है कि वे दूसरे देश में जाकर भी अपराध कर सकते हैं। पीला नोटिस गुमशुदा (आमतौर पर नाबालिगों) के बारे में सूचनाएं देने के लिए प्रकाशित किया जाता है। काला नोटिस किसी लाश की शिनाख्त न होने पर जारी होता है। इसी तरह नारंगी बमों, पार्सल बमों आदि की सूचना देने के लिए जारी होता है।


इसके अलावा इंटरपोल-संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद नोटिस उन व्‍यक्‍ितयों और संस्थों को लेकर जारी होता है, जिन पर सुरक्षा परिषद पाबंदियां लगाती हैं। बैंगनी रंग का नोटिस अपराध के तरीके, वस्‍तुएं, डिवाइस और अपराधियों द्वारा बचने के लिए उपयोग किए गए तरीकों के इस्‍तेमाल के लिए जारी किया जाता है।

Wednesday, July 1, 2015

15 साल में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष में दूसरा डिफॉल्टर देश बना ग्रीस

शशांक शेखर बाजपेई। 
ग्रीस अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष का डिफॉल्टर बनने वाला दुनिया का पहला विकसित देश बन गया है। पिछले 15 वर्षों में यह दूसरा मौका है जब आईएमएफ से किसी देश को डिफॉल्‍टर घोषित किया गया है। इससे पहले 2001 में जिम्बाब्वे ने समय पर कर्ज नहीं चुकाया था। जीवनस्तर के लिहाज से चूक करने वाला यूनान सबसे अमीर देश होगा।

वह तय समयसीमा के अंदर आईएमएफ को कर्जे का 1.7 अरब डॉलर नहीं लौटा पाया है। आईएमएफ के फंड प्रवक्ता गेरी राइस ने कहा कि मैं इस बात की पुष्टि करता करता हूं कि संगठन को समय सीमा के अंदर ग्रीस से पैसे वापस नहीं मिले। उन्होंने कहा कि हमने अपने एग्जीक्यूटिव बोर्ड को सूचना दे दी है कि ग्रीस पर बहुत बकाया हो गया है और उसे अब आईएमएफ से फंड तभी मिल सकता है, जब वह पिछले बकाए का भुगतान कर दे।
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इससे पहले ग्रीस ने साफ कह दिया था कि वह कर्ज का भुगतान नहीं कर पाएगा। इस बीच चिंता की बात यह है कि ग्रीस का यूरोपीय संघ, यूरोपीय केंद्रीय बैंक और आईएमएफ जैसे कर्जदाताओं से अंतरराष्ट्रीय बेलआउट प्रोग्राम की अवधि भी समाप्त हो चुकी है। ग्रीस संकट से यूरो क्षेत्र टूट सकता है और इस बात की भी आशंका है कि अन्य समस्याग्रस्त देशों पर इसका प्रभाव पड़ेगा।

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ग्रीस संकट : कर्ज लेकर घी पीया, अब दीवालिया हो गया 'अमीर' देश

शशांक शेखर बाजपेई। 

ग्रीस संकट क्‍या है और वह कैसे इस स्थिति में पहुंच गया कि उसकी अर्थव्‍यवस्‍था ही दीवालिया होने की कगार पर पहुंच गई। यह जानने के लिए थोड़ा पीछे चलना होगा। वर्ष 2004-09 के दौरान सत्ता संभालने वाली दक्षिणपंथी रुझान वाली मध्यमार्गी सरकार ने जर्मनी सहित कई देशों की बैंकों से बहुत कर्ज लिया। ग्रीस सरकार अपनी कमाई से अधिक राशि कर्ज के भुगतान पर खर्च कर रही है। मगर, इस मामले पर कोई चर्चा नहीं हो रही है।

माना जा रहा था कि यूरो संकट टलने के बाद से एथेंस को जो कर्ज मुहैया कराया जा रहा है, वह उसकी अर्थव्यवस्‍था को मजबूती दे रहा है। लेकिन इस कर्ज का बड़ा हिस्‍सा ग्रीस दूसरे कर्जों और उनके ब्याज को चुकाने पर ही खर्च करता रहा।

पिछले दो वर्षों से यही हो रहा है। यानी एक कर्ज को चुकाने के लिए दूसरा कर्ज लेना और दूसरे को चुकाने के लिए तीसरा। ग्रीस सरकार अपने लोगों पर जितना खर्च करती है, उससे कहीं ज्यादा राजस्व इकट्ठा करती है, ताकि कर्जदाताओं को शांत रखा जा सके।

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फिलहाल इसे ऐसे समझा जा सकता है कि ग्रीस को संकट से उबारने के बजाय सरकार, कर्जदाता देशों के बैंकों को मुनाफा पहुंचाने पर ज्यादा फोकस है। इस पूरी प्रक्रिया में ग्रीस की सरकार बिचौलिये की भूमिका में है। वह विदेशों से पैसा कर्ज लेती है और देश में दूसरे कर्जदारों को बांटती है और देश के कर्जदारों से अधिक ब्‍याज वसूलकर कर्ज की अदायगी करती है।

इस पूरे प्रकरण में होने वाले नुकसान को कर्ज लेने वाले और देने वाले, दोनों पक्ष आपस में बांट लें। निजी कर्जदाताओं का ज्यादातर कर्ज चुका दिया गया है और अब ग्रीस इस स्थिति में नहीं है कि वह अधिक भुगतान कर सके। 30 जून को उसे अंतरराष्‍ट्रीय मुद्रा कोष का करीब 1.8 अरब डॉलर का कर्ज चुकाना था, लेकिन वह ऐसा नहीं कर पाया। 

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ग्रीस की समस्‍या वहां के कमजोर बैंक हैं। वे यूरोपीय केंद्रीय बैंक से कर्ज ले रहे हैं। अगर इस कर्ज को रोका गया, तो ग्रीस का पूरा बैंकिंग तंत्र बिखर जाएगा। ग्रीस के लिए जरूरी है कि केंद्रीय बैंक की साख बनी रहे। हालांकि, यह आखिरकार जर्मनी और दूसरे कर्जदाता देशों के नजरिये पर भी निर्भर है।

यूरोजोन से निकलने का असर

बैंक ऑफ ग्रीस ने यूरोजोन से निकलने को बड़े दुर्भाग्‍य के रूप में पेश किया है। वहां ऐसी स्थिति होने पर अधिक मंदी, बेरोजगारी में इजाफा और आमदनी में गिरावट होगी। ग्रीस में तख्तापलट का इतिहास रहा है और ऐसी स्थिति में वहां राजनीतिक अस्थिरता पैदा हो सकती है। इसके साथ ही आम ग्रीस निवासियों की बचत का अवमूल्यन हो जाएगा और अर्थव्यवस्था के पटरी पर लौटने की संभावना नगण्‍य हो जाएगी।

यूरोजोन को छोड़ने के बाद ग्रीस को मजबूरन रूस की सहायता लेनी पड़ सकती है। सिप्रास ने पहले ही यूक्रेन के मसले पर रूस पर प्रतिबंध का विरोध कर यूरोपीय एकता को चुनौती दी थी। ग्रीस के यूरोजोन से बाहर होने पर रूस के इस सिद्धांत को बल मिलेगा कि यूरोपीय संघ अपने अवसान की ओर है और जल्द ही बिखर जाएगा।

वैश्विक संबंधों में बदलाव

इटली के साथ ग्रीस को भी मध्यपूर्व और उत्तर अफ्रीका से आने वाले आप्रवासियों का भार सहना पड़ रहा है। ग्रीस के रक्षा मंत्री पैनोस कैमेनोस ने धमकी दी थी कि अगर ग्रीस को दिवालिया होने दिया गया तो वो पूरे यूरोप को आप्रवासियों से ‘पाट’ देगा। उधर, मॉस्‍को की ओर ग्रीस के झुकाव का सीधा अर्थ अमेरिका और गठबंधन देशों से दूरी होना है। ऐसे में वैश्‍िवक संबंधों में बदलाव हो सकते हैं।