Saturday, July 25, 2015

यौन शोषण करने वाले आरके पचौरी को पीडि़ता का खुला पत्र

महिला वर्कर से यौन शोषण के आरोप में घिरे आरके पचौरी को टेरी चीफ के पद से हटा दिया गया है। यह खुला पत्र उस लड़की ने लिखा है,‍ जिसका पचौरी ने यौन उत्‍पीड़न किया था। पढि़ए उस मजबूर लड़की ने क्‍या लिखा.....

हममें से कई लोगों के लिए एनर्जी एंड रिसोर्स इंस्‍टीट्यूट में एक ब्रेक पाना किसी सपने के सच होने जैसा है। मैं उस काम को करने जा रही थी, जो मेरे दिल के काफी करीब है और उस व्‍यक्‍ित के साथ करने जा रही थी, जिसकी इस विषय में वैश्विक पहचान है। यह बड़े गर्व की बात थी कि वह व्यक्ति भारतीय था और दूसरे लोग जो विदेश में बसने चले जाते हैं उनके विपरीत उसने रहने के लिए दिल्ली को चुना था। मैं उससे मिलने को व्‍याकुल थी।

मगर, जल्‍द ही मेरे जुनून और गर्व में दरारें पड़ना शुरू हो गईं, जो आने वाले महीनों में इतनी गहरी हो गईं कि मैं खुद को टूटा हुआ और असहाय महसूस करने लगी। हम सभी अपनी जिंदगी में तनाव महसूस करते हैं, लेकिन यह अप्रत्‍याशित था। मेरे जैसे किसी के लिए, जिसने काफी दुनिया घूमी है और सभी तरह के इंसानों से मिली हो। मैं अपने बुरे सपने में भी नहीं सोच सकती कि जिससे मिलने के लिए मैं इतनी उत्‍सुक थी, वह इस तरह का निकलेगा।

मैं मानसिक रूप से थकी हुई घर लौटती थी और खालीपन महसूस करती थी, जैसे किसी ने मेरे आंतरिक अंगों को काटकर बाहर फेंक दिया गया है। दुर्भाग्‍य से कानूनों के तहत उस पर सिर्फ यौन उत्पीड़न का मुकदमा चलाया जा सकता है। मानसिक यातना के लिए नहीं।

मैं आगे बढ़ी और 13 फरवरी 2015 को पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। मगर, प्रेस में मामला आने के पांच दिनों बाद एफआईआर दर्ज हो सकी। मैं खुशकिस्‍मत समझती हूं कि मेरा परिवार मेरे साथ खड़ा है। मेरे पापा के शब्‍द थे - अपराध में चुप बैठना अपराध के एक हिस्‍से की शुरुआत है।

मैंने संस्‍थान के वार्षिक कार्यक्रम का इंतजार किया और उत्‍पीड़न का यह मामला टेरी की इंटरनल कम्‍प्‍लेंट्स कमेटी (आईसीसी) में 9 फरवरी को दर्ज कराया। मुझे सुरक्षित महसूस करना था। मगर, हकीकत जुदा थी। एचआर प्रमुख ने पूछा मैं चुप क्‍यों नहीं रहती। मुझे बताया गया कि यदि ऐसी शिकायत सार्वजनिक हो गई, तो मेरी प्रतिष्‍ठा पर सवाल उठेंगे।

उत्‍पीड़न एक खुला रहस्‍य था और संगठन में काम करने वाले अन्‍य लोग भी इसके गवाह थे। मगर, कोई भी नहीं बोला। आईसीसी के सामने कुछ चुनिंदा लोगों ने ही मेरे बयान का समर्थन किया। टेरी की ओर से कोई भी मुझे सांत्‍वना देने नहीं आया। मुझे निजी वकील करना पड़ा, जबकि यह संगठन की जिम्‍मेदारी थी कि वह मुझे वकील मुहैया कराता।

सत्‍ता, रसूख और पैसे का खेल जल्‍द ही खुल गया। कोर्ट के कई आवेदनों और वरिष्‍ठ वकीलों के साथ दिन के 24 घंटे का समय कम लगने लगा था। इसमें वकीलों के साथ मुलाकात, कागजी कार्यवाही, आगे की जिंदगी की प्‍लानिंग, बीमारी से उबरना यह सब मेरे दिनों में साथ-साथ चल रहे थे।

अमीर और प्रसिद्ध लोगों पर अलग नियम लागू होते हैं। मेरे पास पीआर फर्म करने के लिए पैसे नहीं थे, जबकि दूसरी तरफ से तीन पीआर फर्म बदली गईं। तटस्‍थ होने का नया अर्थ पता चला। संगठन के लिए इसका अर्थ था डायरेक्‍टर जनरल का पक्ष लेना। इसका अर्थ था आईसीसी को भयभीत करना।

कुछ कर्मचारी आईसीसी की रिपोर्ट पूरी करने से पहले उसके सदस्‍यों के घर देर रात जाते थे। गवर्निंग काउंसिल के लिए इसका अर्थ था संज्ञान में नहीं लेना, अकेले प्रतिक्रिया देते रहना (3 अप्रैल 2015 को लिखे मेरे दुखी पत्र के बारे में)। इसका अर्थ था मेरे चरित्र पर टिप्‍पणी करना।

इसका अर्थ था पुलिस जांच में सहयोग नहीं करना। इसका अर्थ था मुझे मेरा वेतन नहीं देना। इसका अर्थ था दोषी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करना। इसका अर्थ था उनका फूलों और मालाओं से स्‍वागत करना। आखिरकार, डायरेक्‍टर जनरल को हटाने का बहुप्रतीक्षित फैसला सुनाया गया।

सच में? आश्‍चर्य की बात यह है कि टेरी की ओर से जारी की गई प्रेस रिलीज वही थी, जो डायरेक्‍टर जनरल की पीआर फर्म ने इससे पहले जारी की थी। फर्म टेरी की ओर से काम कर रही थी या डीजी की ओर से? इसने मुझे चौंका दिया कि डीजी के रिप्‍लेसमेंट का मेरी शिकायत से कोई लेना देना था? उस कार्रवाई का क्‍या हुआ, जो मेरी शिकायत पर की जानी थी? सजा कहां हुई? मुझे तोड़ने के प्रयासों के बीच लड़ाई जारी है। यह मेरी दृढ़ता को नहीं तोड़ सकती। 

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