Thursday, May 28, 2015

ज्‍योतिषियों की राय में दो जून के आस-पास प्राकृतिक आपदा की आशंका

शशांक शेखर बाजपेई।

कैलिफोर्निया में स्थानीय समयानुसार कल शाम चार बजे 9.8 तीव्रता का भूकंप आने वाला है? डच रिसर्चर फ्रैंक होगेरबीट्स की इस भविष्यवाणी की दुनियाभर में हलचल है। उनका कहना है कि भारतीय समयानुसार शुक्रवार सुबह करीब 4.30 बजे पृथ्वी और चंद्रमा की स्थिति बदलेगी। फ्रैंक ने इस संबंध में एक वीडियो भी जारी किया है, जिसे करोड़ों लोग देख चुके हैं।
हालांकि, ज्‍योतिषियों के अनुसार चंद्रमा की स्थिति के कारण कल की तारीख में ऐसा होने की आशंका नहीं है। उज्‍जैन की पंडित रश्मि शर्मा ने बताया क‍ि मंगल और शनि एक दूसरे को देख रहे हैं। दो-तीन जून को चंद्रमा भी नीच का होकर शनि के साथ आ जाएगा। ऐसे में प्राकृतिक आपदा के योग बनेंगे। ऐसे ही योग 25 अप्रैल को भी बने थे, तब नेपाल में भूकंप आया था।
पं. रश्मि शर्मा ने बताया कि दो-तीन जून के आस-पास भूकंप, सुनामी जैसी कोई प्राकृतिक आपदा आने की आशंका अधिक प्रबल रहेगी। इसमें भी जिन देशों के नाम 'न' या 'आर' से शुरू होते हैं (जैसे नेपाल या रशिया), वहां इस तरह की आपदा आने की आशंका अधिक है।
वहीं, दिल्‍ली के पंडित जयगोविंद शास्‍त्री के अनुसार, डच शोधकर्ता का दावा गलत है। उन्‍होंने बताया कि चंद्रमा वर्तमान में अपने नक्षत्र हस्‍त पर है। इसलिए कल वह कोई नकरात्‍मक असर नहीं दिखाएगा। पं. जयगोविंद ने बताया कि सूर्य, चंद्रमा, मंगल, बुध और राहू ये पांच ग्रह पृथ्‍वी तत्‍व की राशि पर हैं। इसलिए चंद्रमा का प्रभाव कमजोर रहेगा।
पंडितजी के अनुसार, चंद्रमा की स्थिति में दो जून के आस-पास बदलाव होने से भारत के उत्‍तर और दुनिया के उत्‍तरी भाग में प्राकृतिक उथल-पुथल के योग जरूर बन रहे हैं। बहरहाल, तारीख को लेकर भले ही मतभेद हों, लेकिन ज्‍योतिषी भी आने वाले समय में जल्‍द ही प्राकृतिक आपदा की आशंका जाहिर कर रहे हैं।

Tuesday, May 26, 2015

विकास को रफ्तार देने और अपनी क्षवि सुधारने का मौका चूके सांसद


शशांक शेखर बाजपेई 

केंद्र सरकार का एक साल पूरा हो गया है। उसके एक साल के क्रियाकलापों का रिपोर्ट कार्ड बीते कई दिनों से अलग-अलग अखबारों में अपने अपने तरीके से पेश हो रहा है। प्रधानमंत्री ने खुद एक साल पूरा होने पर सरकार के कामों का लेखा-जोखा लोगों के सामने रखा। इस बीच सरकार की 'सांसद आदर्श ग्राम योजना' के बारे में कोई खास चर्चा नहीं हुई।

हैरान करने वाली बात है कि उत्‍तर प्रदेश में करीब 65 फीसद सांसदों ने अपने गोद लिए गांव में एक साल में कोई विकास कार्य शुरू ही नहीं किया। यह देश के विकास को रफ्तार देने के साथ ही नेताओं की अपनी निजी क्षवि को सुधारने का बेहतरीन अवसर हो सकता था।

मगर, एक साल बीत जाने के बावजूद जमीनी स्तर पर बदलाव की शुरुआत तक नहीं हुई। अब इसे जनप्रतिनिधियों की लापरवाही कहें या उनकी कामचोरी की लत, लेकिन बड़ी संख्‍या में सांसदों ने अपने गोद लिए गांवों को एक बार जाकर देखा तक नहीं है। न ही उन्‍होंने वहां अपने किसी प्रतिनिधि को गांव भेजने की जहमत उठाई है।

सांसद आदर्श ग्राम योजना की घोषणा 

लोकनायक जयप्रकाश के जन्मदिन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 11 अक्टूबर, 2014 को सांसद आदर्श ग्राम योजना की शुरुआत करने की घोषणा की थी। मकसद था कि सांसद एक-एक गांव को गोद लें और सांसद निधि से मिलने वाले पैसों को गांवों के विकास में लगाएं। गांवों का विकास होगा, तो काम की तलाश में शहरों की ओर होने वाला पलायन रुकेगा। वहां के जीवन स्‍तर में सुधार आएगा साथ ही शहर में बढ़ते जनसंख्‍या के दबाब को कम करने में भी मदद मिलती।

मोदी के गांव में दिखा असर 

योजना शुरू होने के बाद मोदी ने इस योजना के तहत अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी के जयापुर गांव को गोद लिया था। यहां बदलाव की शुरुआत होती दिखने लगी है। वाराणसी-इलाहाबाद हाइवे के पास होते हुए भी इस गांव का नाम भी कम ही लोग जानते थे। योजना की शुरुआत के बाद यहां डाकघर, बैंक और कई मकानों का निर्माण हो चुका है। विकास की रफ्तार धीमी भले ही हो, लेकिन कम से कम जमीनी स्‍तर पर काम होता हुआ दिखने तो लगा है।

देश में आज भी अर्थव्‍यवस्‍था में सबसे अधिक योगदान कृषि कार्य से या यूं कहें कि ग्रामीण भारत से ही आता है। गांधीजी कहा करते थे, गांवों की ओर चलो। गांव सशक्‍त होंगे, तो देश मजबूत होगा। मगर, अभी तक गांव की ओर कोई सांसद जाने को तैयार नहीं है।

इन दिग्‍गजों को नहीं सुध 

समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव ने अपने संसदीय क्षेत्र आजमगढ़ के तमोली गांव, बसपा प्रमुख मायावती ने लखनऊ के माल गांव, कांग्रेस अध्यक्ष और रायबरेली की सांसद सोनिया गांधी ने 1857 के प्रथम स्वाधीनता संग्राम के अमर सेनानी राणा बेनी माधव बख्श सिंह के पैतृक गांव उड़वा, राहुल गांधी ने अमेठी के डीह गांव को गोद लिया था। मगर, इनमें से किसी दिग्‍गज ने इन गांवों में जाना तो दूर अपने प्रतिनिधि को भी वहां भेजना मुनासिब नहीं समझा।

शिवराज से उम्‍मीद

इस बीच मध्‍य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 13 मई 2015 को पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की समीक्षा बैठक में हर गांव को अगले पांच साल में स्मार्ट विलेज बनाने के निर्देश दिए। उन्‍होंने कहा कि स्मार्ट विलेज का सुनियोजित ढंग से विकास होगा। इसके लिए अगले एक माह में एकीकृत ग्राम विकास योजना बनाई जाएगी। मगर, देखना यह होगा कि शिवराज सिंह के यह निर्देश भी खालिस कागजों तक ही न सिमट के रह जाएं।