शशांक शोखर बाजपेई।
रियो ओलिंपिक में हरियाणा की रहने वाली साक्षी मलिक ने कुश्ती में कांस्य जीतकर एथलीट्स के पदक जीतने को लेकर लगी पनौती को तोड़ दिया था। उनके बाद बैटमिंटन खिला़ड़ी पीवी सिंधू ने भी सिल्वर मेडल पक्का कर लिया है। अब देखना यह है कि क्या वह भारत की झोली में स्वर्ण डाल पाएंगी।
इसके लिए प्रधानमंत्री मोदी को ईज ऑफ डूइंग बिजनेस की तर्ज पर ईज ऑफ विनिंग मेडल को अहमियत देनी होगी। यह बात उन्होंने साक्षी मलिक की जबरदस्त जीत के बाद ट्वीट करते हुए कही। बिंद्रा ने कि हर मेडल की कीमत करीब 55 लाख पाउंड होती है। इतना निवेश करने पर ही एथलीट्स से मेडल की उम्मीद करनी चाहिए।
हमारा काम खेलना होता है और उसमें हम अपना सर्वश्रेष्ठ देते हैं। यदि हमारे देश के ओलंपिक में मेडल नहीं आते तो खिलाडियों को दोष देना गलत होगा। हमारे देश के खिलाडियों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। वे विश्व के श्रेष्ठ खिलाडियों के साथ कम्पटीशन करके ओलंपिक तक पहुंचते हैं, ये भी कम उपलब्धि नहीं है।
रियो ओलिंपिक में हरियाणा की रहने वाली साक्षी मलिक ने कुश्ती में कांस्य जीतकर एथलीट्स के पदक जीतने को लेकर लगी पनौती को तोड़ दिया था। उनके बाद बैटमिंटन खिला़ड़ी पीवी सिंधू ने भी सिल्वर मेडल पक्का कर लिया है। अब देखना यह है कि क्या वह भारत की झोली में स्वर्ण डाल पाएंगी।
बीते दिनों चीन की सरकारी मीडिया ने भारत का मजाक उड़ाते हुए खबर प्रकाशित की थी कि भारत ओलिंपिक में पदक जीतने में पीछे क्यों है। इस बीच ओलिंपिक गोल्ड मेडलिस्ट अभिनव बिंद्रा ने कहा है कि एक मेडल को जीतने के लिए करीब 48 करोड़ रुपए का निवेश करना होगा।
ईज ऑफ विनिंग मेडल को दे अहमियत
इसके लिए प्रधानमंत्री मोदी को ईज ऑफ डूइंग बिजनेस की तर्ज पर ईज ऑफ विनिंग मेडल को अहमियत देनी होगी। यह बात उन्होंने साक्षी मलिक की जबरदस्त जीत के बाद ट्वीट करते हुए कही। बिंद्रा ने कि हर मेडल की कीमत करीब 55 लाख पाउंड होती है। इतना निवेश करने पर ही एथलीट्स से मेडल की उम्मीद करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि जब तक हम घर पर इस सिस्टम को लागू नहीं करते हैं, तब तक हमें मेडल की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। बिंद्रा ने कहा कि यदि 2020 में टोक्यो ओलिपिंक में सात मेडल जीतने के लिए भारत को 336 करोड़ रुपए खर्च करने होंगे।
यह राशि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके मंत्रियों द्वारा साल 2015-16 में किए गए विदेश दौरों से काफी कम है। गौरतलब है कि विदेश दौरों में करीब 567 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं।
उदय कोटक भी समर्थन में
कोटक महिंद्रा बैंक के एमडी उदय कोटक ने ट्वीट किया कि भारत 7.6 फीसद की वृध्दि दर से दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है। मगर, आर्थिक सफलता को खेलों के वैभव के रूप में भी दिखना चाहिए।
उदय कोटक ने कहा कि खेल किसी भी देश की प्रगति का संकेत होता है। अमेरिका पदकों की सूची में हमेशा ही आगे रहता है। चीन भी अच्छा कर रहा है। उम्मीद है कि भारत भी जल्द ही कुछ अधिक मेडल अपने खाते में लाएगा। हालांकि, हमें अभी लंबा सफर तय करना है।
बॉक्सर मनोज की गुजारिश, 10 मिनट दें मोदीजी, बदल जाएगा इतिहास
बॉक्सर मनोज ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी से उनके कीमती समय में से मुझे 10 मिनट मांगे हैं ताकि वह खेलों और खिलाडियों की समस्यायों और समाधान से उनको अवगत करा सकें। उन्होंने कहा कि बहुत बेसिक चीजें करके भी हम भारतीय खेलों में क्रन्तिकारी परिवर्तन ला सकते हैं।
उन्होंने कहा कि मुझे दुःख है कि मैं ओलंपिक में देश के लिए मेडल नहीं जीत सका। मैंने अपना श्रेष्ठ देने की कोशिश की और पिछले चार सालों में विपरीत परिस्थितयों में हमने जी तोड़ मेहनत की और ओलंपिक के लिए क्वालीफाई किया। खासकर ऐसे समय में जब मेरे पास कोई स्पॉन्सरशिप नहीं थी, न ही सरकार की ओर से कोई सहायता थी।
जब हम देश के लिए मेडल नहीं जीत पाते तो बहुत दुःख होता है। लेकिन इस बारे में आप कुछ नहीें कर सकते और कई बार मेहनत करने के बाद भी चीजें आपके पक्ष में नहीं जाती। खेल के मैदान में कोई हारना नहीं चाहता हर कोई जीतना चाहता है, लेकिन हार-जीत खेल का हिस्सा हैं।
हम अपना सर्वश्रेष्ठ देते हैं
हमारा काम खेलना होता है और उसमें हम अपना सर्वश्रेष्ठ देते हैं। यदि हमारे देश के ओलंपिक में मेडल नहीं आते तो खिलाडियों को दोष देना गलत होगा। हमारे देश के खिलाडियों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। वे विश्व के श्रेष्ठ खिलाडियों के साथ कम्पटीशन करके ओलंपिक तक पहुंचते हैं, ये भी कम उपलब्धि नहीं है।
मगर, एक खिलाड़ी की हार के पीछे बहुत सारी परिस्थितियां होती हैं, जो हमारे खिलाडियों के प्रदर्शन को प्रभावित करती हैं। किसी खिलाडी के पास जॉब नही होती, कभी स्पॉन्सरशिप नही होती, कभी प्रमोशन की समस्या, कभी परिवार को लेकर समस्याएं, यहां तक कई बार तो खिलाडी के पास ट्रेनिंग और डाइट के लिए भी पैसे नही होते।
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