पांच साल के सफर के बाद जूनो बृहस्पति पर पहुंचेगा, खोलेगा कई रहस्य
वॉशिंगटन। सौर मंडल के सबसे बड़े ग्रह बृहस्पति के रहस्यों से पर्दा उठाने के लिए नासा ने पांच साल पहले, जो आगाज किया था आज वह अंजाम पर पहुंचने जा रहा है।नासा ने 5 अगस्त, 2011 को जूनो अंतरिक्ष यान को लॉन्च किया था, जो 1.7 अरब मील की यात्रा के बाद 4 जुलाई को बृहस्पति ग्रह की कक्षा में प्रवेश कर रहा है। 1.1 अरब डॉलर के इस अभियान का मकसद बृहस्पति के विकिरण बेल्ट में प्रवेश करते हुए इस ग्रह का अध्ययन एवं विश्लेषण करना है।
बृहस्पति की पत्नी का नाम है जूनो

ग्रीक और रोमन मायथोलॉजी में ज्यूपिटर यानी बृहस्पति की पत्नी का नाम जूनो है। मान्यता है कि वह बादलों के जरिये अपने शरारती पति पर नजर रखती थीं। जूनो भी यही काम करेगा। वह भी बादलों के पीछे से बृहस्पति पर नजर रखेगा। माइक्रोवेस रेडियोमीटर का प्रयोग करते हुए जूनो ग्रह के गहरी वायुमंडलीय बनावट, तापमान आदि का पता करेगा।
करीब साढ़े तीन टन वजनी जूनो अंतरिक्ष यान टेनिस कोर्ट के आकार का है। जूनो के सामने सबसे बड़ी चुनौती बृहस्पति ग्रह के भयानक बादलों को घेरे हुए इसके विकिरण बेल्ट में सही दशा-दिशा में बने रहने की है।
इन बातों का पता लगाएगा जूनो
- बृहस्पति के बाद अन्य ग्रहों का निर्माण कैसे हुआ। सूर्य से अलग होकर ग्रह बनने का प्रतिनिधित्व बृहस्पति करता है।
- पिछले 300 सालों से बृहस्पति पर रेड-ऑरेंज निशान उसकी खूबसूरती बढ़ रहे हैं। मगर, वैज्ञानिक नहीं जानते हैं कि वे कैसे बने।
- बृहस्पति का मौसम कैसा है, वहां पानी और ऑक्सीजन की उपस्थिति है या नहीं।
- ग्रह के शक्ितशाली चुंबकीयक्षेत्र में जूने कैसे बना रहता है।
बृहस्पति ग्रह के बारे में
इस ग्रह का औसतन तापमान -145 डिग्री सेल्सियस रहता है। इसको सूर्य की परिक्रमा करने में 12 साल का समय लगता है। इसके चार बड़े और 60 छोटे आकार के चंद्रमा हैं। यह पृथ्वी की तुलना में 11 गुना अधिक बड़ा है। इसका चुंबकीय क्षेत्र पृथ्वी की तुलना में 20 हजार गुना अधिक शक्तिशाली है।
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