शशांक शेखर बाजपेई।
हाइड्रोन बम का परीक्षण कर लेने के उत्तर कोरिया दावे के बाद दुनियाभर में राजनीतिक परिदृश्य बदल गया है। शक्ित संतुलन के लिए उत्तर कोरिया के इस कदम ने भारत के अलावा, दक्षिण कोरिया, जापान, अमेरिका, चीन सहित कई देशों को चिंता में डाल दिया है। यूरोपीय संघ और संयुक्त राष्ट्र ने भी इसकी निंदा की। उत्तर कोरिया ने इससे पहले वर्ष 2013 में परमाणु परीक्षण किया था।
भारत की चिंता
उत्तर कोरिया के इस कदम पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए भारत ने इसे गहन चिंता का विषय बताते हुए पूर्वोत्तर एशिया तथा अपने पड़ोस के बीच परमाणु प्रसार संबंधों को लेक
र भी चिंता जताई। जाहिर तौर पर पड़ोस से आशय पाकिस्तान से है। भारत ने डेमोक्रेटिक पीपल्स रिपब्लिक ऑफ कोरिया (डीपीआरके) से इस तरह की कार्रवाइयों से बचने का आग्रह किया, जिनसे क्षेत्र में शांति और स्थिरता पर प्रतिकूल असर पड़ता हो।
दरअसल, खबर है कि उत्तर कोरिया ने परमाणु हथियारों के लिहाज से उच्च संवर्धित यूरेनियम के लिए जरूरी गैस सेंट्रीफ्यूजिस और अधिकतर मशीनरी के लिए कई डिजाइनें पाकिस्तान से प्राप्त की हैं, जिसके बदले में उत्तर कोरिया ने उसे बैलिस्टिक मिसाइलों के कलपुर्जे दिए हैं। निश्िचत रूप से यह भारत के लिए बड़ी चिंता का विषय है।
दक्षिण कोरिया की चिंता
दक्षिण कोरिया इस बीच अमेरिका के साथ चर्चा कर रहा है कि वह अपने यूएस स्ट्रेटजिक असेस्ट्स को कोरियाई प्रायद्वीप में तैनात करे। इस बीच उसने अलग-थलग पड़े देश पर प्रतिबंध और कड़े करने की मांग भी की। इसके अलावा अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने दक्षिण कोरिया की राष्ट्रपति पार्क गुनहे के साथ अन्य विकल्पों पर भी चर्चा की।
चीन की नाराजगी
उत्तर कोरिया की ओर से गोपनीय तरीके से किए गए इस धमाके के बाद चीन उससे खासा नाराज हो गया है। कारण, उत्तर कोरिया ने अपने अहम सहयोगी को विस्फोट के बारे में पहले से जानकारी नहीं दी थी। ऐसे में इन दो देशों के बीच संबंधों में काफी तनाव नजर आ रहा है। हालांकि, अतीत में दोनों देशों के बीच मधुर संबंध रहे हैं। चीन की प्रमुख चिंता सीमा पर अस्थिरता की है।
जापान भी हुआ सतर्क
उत्तर कोरिया के इस परीक्षण के बाद जापान भी सतर्क हो गया है। उसे इस परीक्षण के बाद अपने देश की सुरक्षा खतरे में दिख रही है। व्हाइट हाउस ने कहा कि जापान के प्रधानमंत्री शिंजो अबे ने राष्ट्रपति बराक ओबामा के साथ फोन पर हुई चर्चा में सहमति जताई कि इस मामले में कड़ी वैश्िवक प्रतिक्रिया की जरूरत है।
अमेरिका का चिंता
उत्तर कोरिया को चीन का करीबी माना जाता है। वहीं, दक्षिण कोरिया को अमेरिका का समर्थक माना जाता है। अमेरिका नहीं चाहता है कि अब कोई भी देश परमाणु हथियारों का परीक्षण करे। इससे क्षेत्र में शक्ित संतुलन बिगड़ेगा। इसके अलावा यदि उत्तर कोरिया के इस कदम का विरोध नहीं किया गया, तो डर है कि ईरान भी अपने परमाणु परीक्षण को जल्दबाजी दिखाते हुए अमेरिकी कूट नीति और दुनिया के देशों के दबाव को धता बता देगा।
हाइड्रोन बम का परीक्षण कर लेने के उत्तर कोरिया दावे के बाद दुनियाभर में राजनीतिक परिदृश्य बदल गया है। शक्ित संतुलन के लिए उत्तर कोरिया के इस कदम ने भारत के अलावा, दक्षिण कोरिया, जापान, अमेरिका, चीन सहित कई देशों को चिंता में डाल दिया है। यूरोपीय संघ और संयुक्त राष्ट्र ने भी इसकी निंदा की। उत्तर कोरिया ने इससे पहले वर्ष 2013 में परमाणु परीक्षण किया था।भारत की चिंता
उत्तर कोरिया के इस कदम पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए भारत ने इसे गहन चिंता का विषय बताते हुए पूर्वोत्तर एशिया तथा अपने पड़ोस के बीच परमाणु प्रसार संबंधों को लेक
र भी चिंता जताई। जाहिर तौर पर पड़ोस से आशय पाकिस्तान से है। भारत ने डेमोक्रेटिक पीपल्स रिपब्लिक ऑफ कोरिया (डीपीआरके) से इस तरह की कार्रवाइयों से बचने का आग्रह किया, जिनसे क्षेत्र में शांति और स्थिरता पर प्रतिकूल असर पड़ता हो।
दरअसल, खबर है कि उत्तर कोरिया ने परमाणु हथियारों के लिहाज से उच्च संवर्धित यूरेनियम के लिए जरूरी गैस सेंट्रीफ्यूजिस और अधिकतर मशीनरी के लिए कई डिजाइनें पाकिस्तान से प्राप्त की हैं, जिसके बदले में उत्तर कोरिया ने उसे बैलिस्टिक मिसाइलों के कलपुर्जे दिए हैं। निश्िचत रूप से यह भारत के लिए बड़ी चिंता का विषय है।
दक्षिण कोरिया की चिंता
दक्षिण कोरिया इस बीच अमेरिका के साथ चर्चा कर रहा है कि वह अपने यूएस स्ट्रेटजिक असेस्ट्स को कोरियाई प्रायद्वीप में तैनात करे। इस बीच उसने अलग-थलग पड़े देश पर प्रतिबंध और कड़े करने की मांग भी की। इसके अलावा अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने दक्षिण कोरिया की राष्ट्रपति पार्क गुनहे के साथ अन्य विकल्पों पर भी चर्चा की।
चीन की नाराजगी
उत्तर कोरिया की ओर से गोपनीय तरीके से किए गए इस धमाके के बाद चीन उससे खासा नाराज हो गया है। कारण, उत्तर कोरिया ने अपने अहम सहयोगी को विस्फोट के बारे में पहले से जानकारी नहीं दी थी। ऐसे में इन दो देशों के बीच संबंधों में काफी तनाव नजर आ रहा है। हालांकि, अतीत में दोनों देशों के बीच मधुर संबंध रहे हैं। चीन की प्रमुख चिंता सीमा पर अस्थिरता की है।जापान भी हुआ सतर्क
उत्तर कोरिया के इस परीक्षण के बाद जापान भी सतर्क हो गया है। उसे इस परीक्षण के बाद अपने देश की सुरक्षा खतरे में दिख रही है। व्हाइट हाउस ने कहा कि जापान के प्रधानमंत्री शिंजो अबे ने राष्ट्रपति बराक ओबामा के साथ फोन पर हुई चर्चा में सहमति जताई कि इस मामले में कड़ी वैश्िवक प्रतिक्रिया की जरूरत है।
अमेरिका का चिंता
उत्तर कोरिया को चीन का करीबी माना जाता है। वहीं, दक्षिण कोरिया को अमेरिका का समर्थक माना जाता है। अमेरिका नहीं चाहता है कि अब कोई भी देश परमाणु हथियारों का परीक्षण करे। इससे क्षेत्र में शक्ित संतुलन बिगड़ेगा। इसके अलावा यदि उत्तर कोरिया के इस कदम का विरोध नहीं किया गया, तो डर है कि ईरान भी अपने परमाणु परीक्षण को जल्दबाजी दिखाते हुए अमेरिकी कूट नीति और दुनिया के देशों के दबाव को धता बता देगा।
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