शशांक शेखर बाजपेई।
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने कहा है कि अच्छे दिन आने वाले हैं। अच्छे दिन जरूर आएंगे। वह दिन दूर नहीं जब ब्रिटेन में भारतीय मूल का प्रधानमंत्री होगा।
कैमरन की यह टिप्पणी महज मोदी या भारत को खुश करने के लिए नहीं की है। इसमें बड़ी दूर के हित निहित हैं। वह दूरदर्शिता इसमें साफ परिलिक्षित हो रही है, जो मोदी भारत के युवाओं में देख रहे हैं।
याद रहे कैमरन उसी ब्रिटेन के प्रधानमंत्री हैं, जिसकी दासता की जंजीरों में भारत करीब 200 साल तक जकड़ा रहा। ब्रिटिश शासन में अपने ही देश में अंग्रेजों के इलाकों में 'इंडियन्स और डॉग्स' नॉट अलाउड थे। आज आजादी के 67 साल बाद भारत उसी ब्रिटेन के साथ आंख मिलाकर बात कर रहा है। दया या मेहरबानी नहीं बराबरी की बात कर रहा है।
क्या यह अच्छे दिनों की दस्तक नहीं है। क्या दाल के भाव और प्याज की कीमतें ही अच्छी सरकार की दशा और दिशा तय करेंगी। हिंदुस्तानियों के सम्मान की कोई कीमत नहीं है। प्रधानमंत्री मोदी कई बार कह चुके हैं और बार-बार दोहरा रहे हैं विकास की यात्रा में अब यह देश रुक नहीं सकता। यह देश जवानी से लबालब है।
राजस्थान के अलवर जिले के इमरान खान का उदाहरण देकर मोदी ने दुनिया को बता दिया कि ऐसे युवाओं से भारत सशक्त है, जो शिक्षा में सहायता के लिए 50 ऐप विकसित कर देश को समर्पित कर चुका है। वह भी मुफ्त में।
ऐसे युवा भारत को बदलने की शक्ित रखते हैं और दुनिया को अपनी सेवाएं देने के लिए तैयार हो रहें हैं। मोदी सरकार का चलाया गया स्किल इंडिया प्रोग्राम, मेक इन इंडिया प्रोग्राम उन्हीं युवाओं को ध्यान में रखकर बनाया गया है, जो आने वाले सालों में देश और दुनिया में भारत का सिर गर्व से ऊंचा करेंगे।
मोदी कह चुके हैं कि कोई कारण नहीं है कि हम गरीब बने रहें। मगर, दो सौ सालों की दासता ने हम हिंदुस्तानियों को गरीबी को बार-बार पुचकारने वाला बना दिया था। या अभी भी हम गरीबी में किए गए संघर्ष को ही आदर्श मानकर चल रहे हैं। मगर, अब इसकी कोई जरूरत नहीं है। मोदी यह बात दुनिया को समझ में आ रही है वरना क्योंकर अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, सऊदी अरब, चीन, जर्मनी आदि अब भारत की ओर देख रहे हैं।
मोदी के नेतृत्व में देश में सफाई और चौबीस घंटे बिजली पाने का सपना लोगों ने देखना शुरू किया। नतीजे आने में अभी समय भले ही लगे, लेकिन नि:संदेह इस दिशा में काम तो शुरू हो ही गया है। इसकी बानगी है सौर ऊर्जा, वायु ऊर्जा और अक्षय ऊर्जा से 150 गीगावॉट ऊर्जा पैदा करने का कार्य शुरू किया है। पहले भारत में बिजली मेगावॉट में आती थी। पहली बार हिंदुस्तान गीगावॉट पर सोच रहा है।
असहिष्णुता के मुद्दे पर मोदी की वह टिप्पणी काबिले तारीफ है भारत विविधताओं से भरा देश है और विविधता हमारी आन, बान, शान है जो हमारी ताकत और गौरव है। मोदी ने शांतिपूर्ण सहअस्तित्व के महत्व को भी रेखांकित किया।
भारत में विविधता का उल्लेख करते हुए मोदी ने ब्रिटेन सहित दुनिया को बताया कि हमारे यहां सौ भाषाएं, 1500 बोलियों और हजारों खानपान की पद्धतियां और सैकड़ों वेश-भूषाएं हैं। इतनी सारी विविधताएं हैं, लेकिन यह विविधता हमारी विशेषता भी है।
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने कहा है कि अच्छे दिन आने वाले हैं। अच्छे दिन जरूर आएंगे। वह दिन दूर नहीं जब ब्रिटेन में भारतीय मूल का प्रधानमंत्री होगा।कैमरन की यह टिप्पणी महज मोदी या भारत को खुश करने के लिए नहीं की है। इसमें बड़ी दूर के हित निहित हैं। वह दूरदर्शिता इसमें साफ परिलिक्षित हो रही है, जो मोदी भारत के युवाओं में देख रहे हैं।
याद रहे कैमरन उसी ब्रिटेन के प्रधानमंत्री हैं, जिसकी दासता की जंजीरों में भारत करीब 200 साल तक जकड़ा रहा। ब्रिटिश शासन में अपने ही देश में अंग्रेजों के इलाकों में 'इंडियन्स और डॉग्स' नॉट अलाउड थे। आज आजादी के 67 साल बाद भारत उसी ब्रिटेन के साथ आंख मिलाकर बात कर रहा है। दया या मेहरबानी नहीं बराबरी की बात कर रहा है।
क्या यह अच्छे दिनों की दस्तक नहीं है। क्या दाल के भाव और प्याज की कीमतें ही अच्छी सरकार की दशा और दिशा तय करेंगी। हिंदुस्तानियों के सम्मान की कोई कीमत नहीं है। प्रधानमंत्री मोदी कई बार कह चुके हैं और बार-बार दोहरा रहे हैं विकास की यात्रा में अब यह देश रुक नहीं सकता। यह देश जवानी से लबालब है।
राजस्थान के अलवर जिले के इमरान खान का उदाहरण देकर मोदी ने दुनिया को बता दिया कि ऐसे युवाओं से भारत सशक्त है, जो शिक्षा में सहायता के लिए 50 ऐप विकसित कर देश को समर्पित कर चुका है। वह भी मुफ्त में।
ऐसे युवा भारत को बदलने की शक्ित रखते हैं और दुनिया को अपनी सेवाएं देने के लिए तैयार हो रहें हैं। मोदी सरकार का चलाया गया स्किल इंडिया प्रोग्राम, मेक इन इंडिया प्रोग्राम उन्हीं युवाओं को ध्यान में रखकर बनाया गया है, जो आने वाले सालों में देश और दुनिया में भारत का सिर गर्व से ऊंचा करेंगे।
मोदी कह चुके हैं कि कोई कारण नहीं है कि हम गरीब बने रहें। मगर, दो सौ सालों की दासता ने हम हिंदुस्तानियों को गरीबी को बार-बार पुचकारने वाला बना दिया था। या अभी भी हम गरीबी में किए गए संघर्ष को ही आदर्श मानकर चल रहे हैं। मगर, अब इसकी कोई जरूरत नहीं है। मोदी यह बात दुनिया को समझ में आ रही है वरना क्योंकर अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, सऊदी अरब, चीन, जर्मनी आदि अब भारत की ओर देख रहे हैं।
मोदी के नेतृत्व में देश में सफाई और चौबीस घंटे बिजली पाने का सपना लोगों ने देखना शुरू किया। नतीजे आने में अभी समय भले ही लगे, लेकिन नि:संदेह इस दिशा में काम तो शुरू हो ही गया है। इसकी बानगी है सौर ऊर्जा, वायु ऊर्जा और अक्षय ऊर्जा से 150 गीगावॉट ऊर्जा पैदा करने का कार्य शुरू किया है। पहले भारत में बिजली मेगावॉट में आती थी। पहली बार हिंदुस्तान गीगावॉट पर सोच रहा है।
असहिष्णुता के मुद्दे पर मोदी की वह टिप्पणी काबिले तारीफ है भारत विविधताओं से भरा देश है और विविधता हमारी आन, बान, शान है जो हमारी ताकत और गौरव है। मोदी ने शांतिपूर्ण सहअस्तित्व के महत्व को भी रेखांकित किया।
भारत में विविधता का उल्लेख करते हुए मोदी ने ब्रिटेन सहित दुनिया को बताया कि हमारे यहां सौ भाषाएं, 1500 बोलियों और हजारों खानपान की पद्धतियां और सैकड़ों वेश-भूषाएं हैं। इतनी सारी विविधताएं हैं, लेकिन यह विविधता हमारी विशेषता भी है।

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