Tuesday, November 10, 2015

अपने पेशे के अनुसार, तय करें दिवाली पूजन का मुहूर्त

शशांक शेखर बाजपेई। 
देवगुरु बृहस्पति के अनुसार, कार्तिक मास की अमावस्या को शाम को सूर्यास्त हो जाने के बाद ही दीवाली का ‘पर्वकाल’ प्रारंभ होता है। लक्ष्‍मी योग के इस मुहूर्त में भगवती लक्ष्मी का पूजन करना गृहस्थ जनों के लिए शुभ माना जाता है।

आगरा के पंडित उद्देश्‍य गुप्‍ता ने बताया कि इससे घर का आर्थिक संकट दूर होता है तथा परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार आता है। इससे घर का आर्थिक संकट दूर होता है तथा परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार आता है।

व्‍यापारियों के लिए ये मुहूर्त दीवाली की रात को तृतीय प्रहर में कुबेर योग आता है। धन के स्‍वामी कुबेर के इस मुहूर्त में पूजा करना उद्योगपतियों और व्यापारियों की इच्‍छाओं को पूरा करता है। इसमें फैक्ट्री-कारखाना या दुकान की गद्दी पर दीपावली-पूजन प्रचुर लाभदायक सिद्ध होता है।

सरकारी अधिकारियों और नेताओं के लिए है इंद्रयोग। भगवान गणपति, महालक्ष्मी और कुबेर जी के साथ ही दीवाली की रात देवताओं के राजा इंद्र का भी आह्वान किया जाता है। अमावस्या की रात द्वितीय प्रहर में इंद्रयोग आता है।

सरकारी अधिकारियों, प्रशासनिक अधिकारियों और राजनेताओं को इस योग में पूजन करना चाहिए। ‘इंद्र योग’ सत्ता, पदोन्नति के साथ ही वेतन-वृद्धि के इच्छुक भक्तों का कार्यक्षेत्र फलीभूत करता है। इस प्रकार देवगुरु बृहस्पति द्वारा बताए गए लक्ष्मी योग, इंद्र योग और कुबेर योग अपने नाम के अनुरूप फल प्रदान करते हैं।

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