Friday, August 17, 2018

अटलजी को विनम्र श्रद्धांजलि, जीवन बीत चला...


16 अगस्त गुरुवार को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का एम्स में निधन हो गया। 25 दिसंबर 1934 को ग्वालियर में जन्मे अटल जी जितने महान राजनेता थे, उतने ही उच्च कोटि के कवि भी थे। उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि...


कल कल करते आज,
हाथ से निकले सारे,
भूत भविष्यत की चिंता में,
वर्तमान की बाजी हारे।

पहरा कोई काम न आया,
रसघट रीत चला,
जीवन बीत चला।

हानि लाभ के पलड़ों में,
तुलता जीवन व्यापार हो गया,
मोल लगा बिकने वाले का,
बिना बिका बेकार हो गया।

मुझे हाट में छोड़ अकेला,
एक एक कर मीत चला,
जीवन बीत चला। - अटल बिहारी वाजपेयी। 

Thursday, May 24, 2018

25 मई से अगले नौ दिन रहें सावधान, झुलसा देगी सूर्य की गर्मी

शशांक शेखर बाजपेई। सूर्य के 25 मई को शाम 7.53 बजे रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश के साथ ही नौतपा शुरू हो जाएगा। नौतपा साल के वे 9 दिन होते हैं जब सूर्य पृथ्वी के सबसे निकट आ जाता है, जिस कारण भीषण गर्मी पड़ती है।

इस महीने में सूर्य के वृष राशि के 10 अंश से 23 अंश 40 कला तक नौतपा कहलाता है। इस दौरान तेज गर्मी रहने पर बारिश के अच्छे योग बनता है। वहीं, यदि रोहिणी के दौरान अगर बारिश होती है, तो इसे रोहिणी का गलना कहा जाता है।

मान्यता है कि यदि रोहिणी नक्षत्र में बारिश हो जाती है तो आने वाले बारिश के मौसम में वर्षा बहुत कम होती है।
जिस समय में सूर्य रोहिणी नक्षत्र में आते हैं, उस समय चंद्रमा नौ नक्षत्रों में भ्रमण करते हैं। यही कारण है कि इसे नौतपा कहा जाता है।

ऐसा माना जाता है कि सूर्य की गर्मी और रोहिणी के जल तत्व के कारण मॉनसून गर्भ में आ जाता है और नौतपा ही मानसून का गर्भकाल माना जाता है। दरअसल, रोहिणी नक्षत्र का अधिपति ग्रह चंद्रमा होता है। सूर्य तेज का और चंद्रमा शीतलता का प्रतीक होता है।

सूर्य जब चांद के नक्षत्र रोहिणी में प्रवेश करता है, तो सूर्य इस नक्षत्र को अपने प्रभाव में ले लेता है, जिसके कारण ताप बहुत अधिक बढ़ जाता है। इस दौरान ताप बढ़ जाने के कारण पृथ्वी पर आंधी और तूफान आने लगते हैं।   
इस बार आषाढ़ के दो महीने होंगे। पहला आषाढ़ 3 जून से 2 जुलाई तक और दूसरा आषाढ़ 3 जुलाई से 31 जुलाई तक रहेगा। शास्त्रों में कहा गया है कि आषाढ़ मास की अधिकता से खंडवृष्टि का योग बनता है। यानी रुक-रुक कर बारिश होती है।

इस बार 25 से 30 मई तक सूर्य, मंगल, बुध का शनि से समसप्तक योग होने से धरती खूब तपेगी। 30 मई को शुक्र के कर्क में जाने से गुरु-शुक्र का योग बनेगा, जो गर्मी के साथ-साथ कहीं-कहीं बादल वर्षा का भी कारक बनेगा। आर्द्रा नक्षत्र का प्रवेश 22 जून को और ग्रहों का योग वर्षा काल में अच्छी बारिश के संकेत दे रहा है।

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Wednesday, May 9, 2018

इन पांच दिनों में न करें कोई नया काम, शुरू हो गए हैं अग्नि पंचक

शशांक शेखर बाजपेई। पंचांग के अनुसार पंचक काल 08 मई 2018 को रात 09:00 बजे से प्रारंभ हो रहे हैं, जो 13 मई 2018 को दोपहर 01 बजकर 32 मिनट तक समाप्त होंगे। शास्त्रों में पंचक में किसी भी शुभ या नए कार्य को करने की सख्त मनाही है। इस काल में आपने कोई कार्य किया तो उसका फल प्राप्त नहीं होता है।

इस बार पंचक मंगलवार को शुरु होने के कारण इन्हें 'अग्नि पंचक' कहा जा रहा है। इन पांच दिनों में अग्नि से भय बना रहता है। शास्त्रों में पंचक के समय दक्षिण दिशा की यात्रा करना और लकड़ी का सामान खरीदना वर्जित बताया गया है। धनिष्ठा पंचकं त्याज्यं तृण काष्ठा-दि-संग्रहे। त्याज्या दक्षिण दिग्यात्रा गृहाणां छादनं तथा।।

पांच दिनों का यह समय, वर्ष में कई बार आता है। इसलिए कोई भी नया कार्य इन पांच दिनों में शुरू नहीं करना चाहिए। इसके लिए आप किसी जानकार ज्योतिषी से परामर्श लेना चाहिए। शास्त्रों में कहा गया है कि इन पांच नक्षत्रों की युति यानी गठजोड़ अशुभ होता है।

यू-ट्यूब लिंक- अग्नि पंचक हो रहे हैं शुरू, जानें किन बातों का रखें ध्यान 

पांच नक्षत्रों के संयोग को पंचक कहते हैं। 27 नक्षत्रों में अंतिम पांच नक्षत्र- धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती नक्षत्रों को पंचक कहा जाता है। ‘मुहूर्त चिंतामणि’ में उल्लेख है कि इन नक्षत्रों की युति में किसी की मृत्यु होने पर परिवार के अन्य सदस्यों को मृत्यु या मृत्यु तुल्य कष्ट का भय बना रहता है।

गरुण पुराण के अनुसार, पंचक के दौरान शव का अंतिम संस्कार करते समय किसी योग्य जानकार से पूछकर आटे या कुश के पांच पुतलों को भी अर्थी पर रखकर पूरे विधान के साथ अंतिम संस्कार करने से पंचक के दोष से मुक्ति मिलती है।

इन कामों को नहीं करना चाहिए 

1- पंचक के दौरान जिस समय घनिष्ठा नक्षत्र हो उस समय घास, लकड़ी आदि ईंधन एकत्रित नही करना चाहिए, इससे अग्नि का भय रहता है।

2- पंचक के दौरान दक्षिण दिशा में यात्रा नही करनी चाहिए, क्योंकि दक्षिण दिशा, यम की दिशा मानी गई है। इन नक्षत्रों में दक्षिण दिशा की यात्रा करना हानिकारक माना गया है।

3- पंचक के दौरान जब रेवती नक्षत्र चल रहा हो, उस समय घर की छत नहीं बनाना चाहिए, ऐसा विद्वानों का मत है। इससे धन हानि और घर में क्लेश होता है।

4- पंचक में चारपाई बनवाना भी अशुभ माना जाता है। विद्वानों के अ
नुसार ऐसा करने से कोई बड़ा संकट खड़ा हो सकता है।

5- पंचक में शव का अंतिम संस्कार नही करना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि पंचक में शव का अन्तिम संस्कार करने से उस कुटुंब में पांच मृत्यु और हो जाती है।

ये शुभ काम कर सकते हैं 


पंचक में आने वाले नक्षत्रों में शुभ कार्य हो सकते हैं। पंचक में आने वाला उत्तराभाद्रपद नक्षत्र वार के साथ मिलकर सर्वार्थसिद्धि योग बनाता है, वहीं धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद व रेवती नक्षत्र यात्रा, व्यापार, मुंडन आदि शुभ कार्यों में श्रेष्ठ माने गए हैं। इस दौरान सगाई, विवाह आदि शुभ कार्य भी किए जाते हैं।

Thursday, May 3, 2018

VIDEO : पीएम मोदी ने दिया राहुल गांधी को होम वर्क, जानें मामला

शशांक शेखर बाजपेई। मोक्षगुंडम विश्वेश्वरय्या का जन्म 15 सितम्बर 1861 - और निधन 14
अप्रैल 1962 को हुआ था। उनके नाम को लेकर भिड़े हैं राहुल गांधी और पीएम मोदी। मामला यहां तक बढ़ गया है कि पीएम मोदी ने राहुल गांधी को विश्वेश्वरय्या नाम अपने भाषण में पांच बार बोलने की चुनौती या कहें होम वर्क दे दिया है।
गुलामी के दौर में अपनी प्रतिभा से भारत के विकास में योगदान देने वाले सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया युगद्रष्टा इंजीनियर थे। बहुत कम लोगों को पता होगा कि हर साल 15 सितंबर को उनकी याद में ही इंजीनियर दिवस मनाया जाता है। जानते हैं उनके बारे में...

वीडियो देखें- राहुल गांधी को पीएम मोदी ने दी ऐसी चुनौती...

उनका एक किस्सा काफी दिलचस्प है। यह उस समय की बात है जब भारत में अंग्रेजों का शासन था। खचाखच भरी एक रेलगाड़ी चली जा रही थी। यात्रियों में अधिकतर अंग्रेज थे। एक डिब्बे में एक भारतीय मुसाफिर गंभीर मुद्रा में बैठा था।

सांवले रंग और मंझले कद का वह यात्री साधारण वेशभूषा में था इसलिए वहां बैठे अंग्रेज उसे मूर्ख और अनपढ़ समझ रहे थे और उसका मजाक उड़ा रहे थे। पर वह व्यक्ति किसी की बात पर ध्यान नहीं दे रहा था। अचानक उस व्यक्ति ने उठकर गाड़ी की जंजीर खींच दी।

तेज रफ्तार में दौड़ती वह गाड़ी तत्काल रुक गई। सभी यात्री उसे भला-बुरा कहने लगे। थोड़ी देर में गार्ड भी आ गया और उसने पूछा, ‘जंजीर किसने खींची है?’ उस व्यक्ति ने उत्तर दिया, ‘मैंने खींची है।’ कारण पूछने पर उसने बताया, ‘मेरा अनुमान है कि यहां से लगभग एक फर्लांग की दूरी पर रेल की पटरी उखड़ी हुई है।’

गार्ड ने पूछा, ‘आपको कैसे पता चला?’ वह बोला, ‘श्रीमान! मैंने अनुभव किया कि गाड़ी की स्वाभाविक गति में अंतर आ गया है। पटरी से गूंजने वाली आवाज की गति से मुझे खतरे का आभास हो रहा है।’ गार्ड उस व्यक्ति को साथ लेकर जब कुछ दूरी पर पहुंचा तो यह देखकर दंग रहा गया कि वास्तव में एक जगह से रेल की पटरी के जोड़ खुले हुए हैं और सब नट-बोल्ट अलग बिखरे पड़े हैं। दूसरे यात्री भी वहां आ पहुंचे।

जब लोगों को पता चला कि उस व्यक्ति की सूझबूझ के कारण उनकी जान बच गई है तो वे उसकी प्रशंसा करने लगे। गार्ड ने पूछा, ‘आप कौन हैं?’ उस व्यक्ति ने कहा, ‘मैं एक इंजीनियर हूं और मेरा नाम है डॉ॰ एम. विश्वेश्वरैया।’ नाम सुन सब स्तब्ध रह गए। दरअसल उस समय तक देश में डॉ॰ विश्वेश्वरैया की ख्याति फैल चुकी थी। लोग उनसे क्षमा मांगने लगे। डॉ॰ विश्वेश्वरैया का उत्तर था, ‘आप सब ने मुझे जो कुछ भी कहा होगा, मुझे तो बिल्कुल याद नहीं है।’

चिर यौवन का रहस्य- भारत-रत्न से सम्मानित विश्वेश्वरैया ने सौ वर्ष से अधिक की आयु पाई और अंत तक सक्रिय जीवन व्यतीत किया। एक बार एक व्यक्ति ने उनसे पूछा, 'आपके चिर यौवन का रहस्य क्या है?' डॉ॰ विश्वेश्वरैया ने उत्तर दिया, 'जब बुढ़ापा मेरा दरवाजा खटखटाता है, तो मैं भीतर से जवाब देता हूं कि विश्वेश्वरैया घर पर नहीं है और वह निराश होकर लौट जाता है। बुढ़ापे से मेरी मुलाकात ही नहीं हो पाती तो वह मुझ पर हावी कैसे हो सकता है?'

यू-ट्यूब लिंक- https://www.youtube.com/channel/UC686WY9hGI_QAwuH8rZkdBw

Tuesday, May 1, 2018

मांगलिक होना दोष या योग, जानें क्या है सही

शशांक शेखर बाजपेई। आमतौर पर यही सुनने को मिलता है कि मांगलिक होना शुभ नहीं है। कम से कम लड़कियों के मामले में जरूर यही कहा जाता है। बहुत से तथाकथित ज्ञानी ज्योतिषों ने यह दुष्प्रचार कर रखा है कि मांगलिक होना खराब है। मगर, क्या आप जानते हैं कि मांगलिक होने से होता क्या है? मंगल ग्रह करता क्या है? जातक मांगलिक कैसे होता है? क्या मांगलिक होना दोष है या मांगलिक होना योग है? 

दरअसल, यह एक तर्कसंगत ग्रह है। लग्न, चौथे भाव, सातवें भाव, आठवें भाव और बारहवें भाव में मंगल ग्रह होने पर जातक मांगलिक होता है। इसकी शुक्र के साथ युति होने से व्यक्ति गतिणतज्ञ बनता है। कड़े निर्णय लेता है। मांगलिक व्यक्ति प्रेम भी करेगा, तो तर्क के साथ। उसके प्रेम में दो और दो चार होगें, चाहें परिस्थितियां कैसी भी हों। अन्य प्रेमी परिस्थितियों के अधीन दो और दो का जोड़ तीन या पांच भी कर सकते हैं।

बात करते हैं विवाह की। वर में मांगलिक दोष हो तो चल जाता है, लेकिन कन्या में मांगलिक दोष वैवाहिक जीवन को खराब कर देता है। मांगलिक लड़की की एक गैर मांगलिक लड़के साथ शादी हो, तो कन्या वर पर दबाव बनाए रखेगी। यानी सीधे शब्दों में कहा जाए तो वर पर हावी रहेगी। ऐसा में यदि वर संवेदनशील है तो वैवाहिक जीवन में व्यवधान तो होंगे ही। वहीं, वर के मांगलिक होने और कन्या मांगलिक न हो तो वर-वधु पर हावी रहेगा। ऐसा अपने भारतीय समाज में ठीक भी माना जाता है।

मंगल ग्रह यदि आठवें या बारहवें भाव में हो तो ऐसा होना खराब होता है। हालांकि, कुछ विशेष परिस्थितियों में या शुभ ग्रहों की युति से कुछ अच्छे परिणाम भी दे सकता है। लग्न में मंगल जातक के व्यक्तित्व को बहुत तीक्ष्ण बना देता है। वहीं, चौथे भाव में मंगल जातक को कड़ी पारिवारिक पृष्ठभूमि देता है। सातवें स्थान का मंगल जातक को साथी या सहयोगी के प्रति कठोर बनाता है। 

आठवें और बारहवें स्थान का मंगल आयु और शारीरिक क्षमताओं को प्रभावित करता है। इन स्थानों पर बैठा मंगल यदि अच्छे प्रभाव में है तो जातक के व्यवहार में मंगल के अच्छे गुण आएंगे और खराब प्रभाव होने पर खराब गुण आएंगे। 

जैसे मंगल की शुभ ग्रहों के साथ युति जातक को सेना, पुलिस आदि में उच्च पदों पर ले जाती है। वहीं अशुभ ग्रहों की स्थिति चोर, डाकू या आतंकवादी बना सकती है। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि उच्चपदस्य सैन्य अधिकारी और कुख्यात आतंकवादी दोनों की कुंडली में मंगल ग्रह का जबरदस्त प्रभाव होगा।

मांगलिक व्यक्ति कठोर निर्णय लेने वाला, कठोर वचन बोलने वाला, लगातार काम करने वाला, विपरीत लिंग के प्रति कम आकर्षित होने वाला, योजनाबद्ध काम करने वाला, कठोर अनुशासन वाला, नए अनजाने कामों को शीघ्रता से हाथ में लेने वाला और लड़ाई को तत्पर रहता है। इसके चलते गैर मांगलिक जातक इनके साथ अधिक समय तक नहीं रह पाते।

Monday, April 30, 2018

मकर राशि में केतु और मंगल की होगी 02 मई से युति, जानें कैसा होगा आपकी राशि पर असर

शशांक शेखर बाजपेई। ग्रहों के सेनापति मंगल 02 मई को धनु राशि को छोड़कर मकर राशि में गोचर करने जा रहे हैं, जहां वह 06 नवंबर तक रहेंगे। मकर राशि में इन्हें उच्च प्रभाव देने वाला माना गया है। इस राशि में केतु पहले से मौजूद हैं। वैसे तो छाया ग्रह केतु जिस भी ग्रह के साथ होते हैं, उसी का स्वभाव ग्रहण कर लेते हैं। मगर, इन्हें मंगल के समान माना गया है। ऐसे में मकर राशि में मंगल के साथ मौजूद केतु भी मंगल के जैसा ही प्रभाव देंगे। 'शनि वत राहु- कुज वत केतु'।

मेष और वृश्चिक राशि के स्वामी मंगल ग्रह की शांति के लिए मंगलवार का व्रत और हनुमान चालीसा का पाठ करना लाभकारी साबित होगा। मंगल की महादशा 7 वर्ष तक रहती है। इस दौरान कुछ सावधानियां रखी जाएं, तो जिन लोगों की कुंडली में मंगल उच्च के हैं या लाभ स्थान में बैठे हैं, उन्हें प्रमोशन, तरक्की, आर्थिक लाभ के मौके मिलेंगे। मान सम्मान बढ़ेगा। जिन जातकों की कुंडली में मंगल की स्थिति ठीक नहीं है, वे विशेष सतर्कता रखें।

यहां एक बात और ध्यान रखने की है कि यह युति शनि के घर मकर में हो रही है। शनि का आधिपत्य होने के कारण वह जातक को सीमाओं में बांधना चाहते हैं। नियम- कायदों का पालन करने के लिए बाध्य करते हैं, वहीं मंगल स्वतंत्र विचार, उग्रता, नियमों को न मानने वाला ग्रह है। जानते हैं राशियों पर इस गोचर के प्रभाव...

मेष
मंगल का गोचर आपकी राशि से दसवें स्थान पर होगा। अत: आपको शुभ समाचार मिलेंगे। नौकरी, व्यापार, व्यवसाय में विस्तार होगा। कोई नया काम शुरू करना चाह रहे हैं तो उसके लिए भी समय शुभ है।

वृषभ
मंगल का गोचर आपकी कुंडली में नौवें भाव में रहेगा। धर्म-कर्म की ओर मन आकृष्ट होगा। लंबी यात्राओं के योग बन रहे हैं। जिन लोगों के काम का संबंध विदेश से है, उन्हें इस दौरान ज्यादा लाभ हो सकता है।

मिथुन
मंगल का गोचर आठवें भाव में होगा, जो आपके लिए बहुत शुभ नहीं है। अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखें।

कर्क
मंगल का गोचर आपकी कुंडली में सातवें भाव में रहेगा। मंगल की यह स्थिति मिश्रित परिणाम देगी। काम धंधे और संतान के लिए काफी अनुकूल परिणाम मिलेंगे। पत्नी के साथ संबंधों में तनाव हो सकता है।

सिंह
मंगल का गोचर आपकी कुंडली में छठवें भाव में रहेगा। इस अवधि में दूर की यात्रा में परेशानी हो सकती है, लिहाजा सतर्क रहें। खर्च बढ़ेंगे। प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए समय अनुकूल है।

कन्या
मंगल का गोचर पांचवें भाव में होगा। कम दूरी की यात्राएं हो सकती हैं। छोटे भाइयों से मदद मिल सकती है।

तुला
मंगल का गोचर चौथे भाव में रहेगा। यह ग्रह परिवर्तन आपके लिए शुभ है। आर्थिक स्थिति बेहतर होगी। उग्रता में नियंत्रण रखें।

वृश्चिक
मंगल का गोचर तीसरे भाव में शुभ रहेगा। छोटे भाइयों से मदद मिलेगी। मान-सम्मान बढ़ने के भी योग हैं। कार्यस्थल पर बेहतर कार्य करेंगे।

धनु
मंगल का गोचर दूसरे भाव में रहेगा। कुछ खर्चे अचानक हो सकते हैं। वाणी पर नियंत्रण रखें। परिवार के सदस्यों से बनाकर चलें।

मकर
मंगल का गोचर आपकी ही राशि में हो रहा है। स्वास्थ्य पर ध्यान दें और क्रोध पर नियंत्रण रखें। वाहन चलाने में थोड़ी सावधानी बरतें। भूमि या भवन खरीदने के योग बनेंगे।

कुंभ
मंगल का गोचर 12वें भाव में रहेगा। इस दौरान सावधान रहें, फिजूल खर्ची से बचें। यात्रा के योग बन सकते हैं। यदि आपका काम विदेश से संबंधित है, तो लाभ होगा।

मीन
मंगल का गोचर 11वें भाव में रहेगा। आर्थिक स्थिति बेहतर होगी, भाग्य साथ देगा। यात्रा के योग बनेंगे और आय के योग बनेंगे। 

Sunday, April 29, 2018

शनि 18 से हो गए हैं वक्री, साढ़े साती वालों को मिलेगी राहत

शशांक शेखर बाजपेई। न्यायाधीश माने जाने वाले शनि बुधवार 18 अप्रैल 2018 को धनु राशि में वक्री हो चुके हैं। वह गुरुवार, 6 सितंबर 2018 की शाम को फिर से मार्गी हो जाएंगे। जब भी कोई ग्रह धरती के करीब आ जाता है यानी वक्री हो जाता है, तो उसके फल देने की क्षमता बढ़ जाती है।

किसी भी ग्रह के वक्री होने से वह ग्रह उल्टी दिशा में नहीं चलने लगता है। दरअसल, उसकी गति इतनी धीमी हो जाती है कि धरती के सापेक्ष वह पीछे जाता हुआ दिखता है, जबकि असल में ऐसा होता नहीं है। ग्रह तो हमेशा ही अपने मार्ग पर चलते रहते हैं। हालांकि, पृथ्वी के सापेक्ष गति धीमी होने के कारण वे वक्री नजर आते हैं।

वक्री होने का असर

कोई भी ग्रह बुरा नहीं होता है और वह सभी को बुरे फल नहीं देता है। मगर, हर व्यक्ति की कुंडली में ग्रह की स्थिति अलग-अलग होती है। लिहाजा, उसकी के अनुसार ग्रह अच्छे या बुरे फल देते हैं। शनि को न्याय का देवता है, इसलिए पूर्व में किए गए कर्मों का फल देता है।

इसीलिए कुछ लोग शनि की दशा, महादशा, साढ़े साती में बर्बाद हो जाते हैं, तो वहीं कुछ लोग इस दौर में शीर्ष पर पहुंच जाते हैं। वक्री होने की दशा में ग्रहों के फल देने की क्षमता बढ़ जाती है। शनि सामान्य परिस्थितियों में जो फल धीरे-धीरे देता है, वक्री होने पर तेजी से देने लगता है।

इन पांच राशियों पर असर

वर्तमान समय में शनि की साढ़े साती वृश्चिक, धनु और मकर राशि पर चल रही है। वहीं, वृषभ और कन्या पर ढैय्या चल रही है। इन 5 राशियों के जातकों को विशेष रूप से सावधान रहने की जरूरत है। प्रतिकूल स्थितियों के चलते पारिवारिक जीवन में कलह हो सकती है।

काले कपड़े नहीं पहनें, वाहन सावधानी से चलाएं, धन के लेन-देन, बड़ा निवेश करने से पहले अच्छी तरह से सोच विचार कर ही फैसला करें। अगर आपके कर्म पूर्व में अच्छे रहे हैं और आपने किसी का बुरा नहीं किया है, तो शनि से डरने की जरूरत नहीं है।

कुंडली में शनि ग्रह यदि पीड़ित है, तो वह मानसिक कष्ट जरूर दे सकता है। इससे बचने के लिए शनि चालीसा और शनि स्त्रोत का पाठ करें। ऊं शनिश्चराय नम: मंत्र का जाप करें। हनुमान चालीसा, हनुमान आराधना करने से भी कष्टों से मुक्ति पा सकते हैं।

VIDEO : शनि का वक्री होना, जानें कैसे होता है कोई ग्रह वक्री

Wednesday, April 25, 2018

'ज्योतिष लय ब्रह्मांड की बहती सरित समान, उद्गम पर अध्यात्म है संगम पर विज्ञान'

शशांक शेखर बाजपेई। ज्योतिष विद्या भारत की बहुत सी महान उपलब्धियों में से एक है। हमारे ऋषियों और मुनियों ने वर्षों की अथाह मेहनत के बाद इस इस विज्ञान को लिपिबद्ध किया। ज्योतिष की शुरुआत समस्याओं के निरकरण के लिए नहीं हुई थी। यह तो महज मानव मन की जिज्ञासा थी, जो सबसे पहले सूर्य, चांद, पृथ्वी और तारों को देखकर सहज ही सबसे पहले इंसान के दिमाग में आई।

जब इसके बारे में और जानने की इच्छा हुई तो ऋषियों ने सूर्य के दिन में और चंद्रमा के रात में निकलने का कारण जानना चाहा। इस दौरान उन्हें पृथ्वी के परिभ्रमण और परिक्रमण का पता चला, जिसकी वजह से दिन और रात होते थे। मौसम में परिवर्तन भी इसी कारण से होता था।

यही ज्ञान धीरे-धीरे बढ़ता गया और ज्योतिष विधा का जन्म हुआ। शुरुआत में इंसान के पास न तो रहने की समस्या थी और न ही खाने की। ऐसे में ज्योतिष का प्रयोग मौसम की जानकारी करने के लिए होता था। मगर, आज जबकि समय तेजी से चल रहा है और लोगों के पास हजारों समस्याएं हैं, ऐसे में उनका कारण और निराकरण सिर्फ इसी विधा से सही से लगाया जा सकता है क्योंकि यह विज्ञान पर आधारित है। कुंडली पर आधारित फलित ज्योतिष का संबंध वेदों से नहीं है।

ज्योतिष विज्ञान की श्रेणी में आता है। यह उतना ही पुराना है जितने वेद, इसलिए इसे वेदांग भी कहते हैं। जो तारे-सितारों की चमक या ज्योति दिखाई दे रही है उसका धरती के मौसम और जीवों के शरीर तथा मन पर होने वाले असर का अध्ययन करने की विद्या को ही ज्योतिष विद्या कहा जाता है।

वैदिक ज्ञान के बल पर भारत में एक से बढ़कर एक खगोलशास्त्री, ज्योतिष व भविष्यवक्ता हुए हैं। इनमें गर्ग, आर्यभट्ट, भृगु, बृहस्पति, कश्यप, पाराशर वराहमिहिर, पित्रायुस, बैद्धनाथ आदि प्रमुख हैं। वराहमिहिर का ज्ञान काफी उच्चकोटि का था और इस ज्ञान को उन्होंने यवनों को भी दिया था। भारत से यह ज्ञान ग्रीक गया। भारत के साथ ही ग्रीक, चीन, बेबीलोन, परशिया (ईरान) आदि देशों के विद्धानों ने भी ज्योतिष शास्त्र का विस्तार अपने यहां की आबो-हवा को जानकर किया। आज से करीब 2600 वर्ष पूर्व चेल्डिया के पंडितों व पुजारियों ने इस विषय पर गहन शोध किया और इसकी बारीकियों को उजागर किया।

प्रारंभ में यह ज्ञान राजा, पंडित, आचार्य, ऋषि, दार्शनिक और विज्ञान की समझा रखने वालों तक ही सीमित था। ये लोग इस ज्ञान का उपयोग मौसम को जानने, वास्तु रचना करने तथा सितारों की गति से होने वाले परिवर्तनों को जानने के लिए करते थे। इस ज्ञान के बल पर वे राज्य को प्राकृतिक घटनाओं से बचाते थे और ठीक समय पर ही कोई कार्य करते थे।

धीरे-धीरे यह विद्या जन सामान्य तक पहुंची तो राजा और प्रजा सहित सभी ने इस विद्या में मनमाने विश्वास और धारणाएं जोड़ी। अंध विश्वास के कारण धीरे-धीरे इसमें विकृतियां आने लगीं, लोग इसका गलत प्रयोग करने लगे। राजा भी इस विद्या के माध्यम से लोगों को डराकर अपने राज्य में विद्रोह को दबाना चाहता था और पंडित ने भी अपना चोला बदल लिया था।

इस सब कारण के चलते विद्धान ज्योतिषाचार्य व ज्योतिषग्रंथ समाप्त हो गए। शोध कार्य मृतप्राय होकर बंद हो गया। अज्ञानी लोगों ने ज्योतिष का दुरुपयोग करना शुरू कर दिया। इसे व्यापार का रूप देकर धन कमाने के लालच में झाूठी भविष्यवाणी करके शोषक वर्ग शोषण के धंधे में लग गया।

जो भविष्यवाणी सच नहीं होती उसके भी मनमाने कारण निर्मित कर लिए जाते और जो सच हो जाती उसका बढ़ाचढ़ाकर प्रचार-प्रसार किया जाता है। ऐसे में जरूरत है इस विद्या के बारे में सही जानकारी प्राप्त कर सही ज्ञान का विस्तार करने की। हालांकि, अब इस विषय पर एक बार फिर से लोगों की रुचि जागी है और कई लोगों ने शोध कार्य शुरू किए हैं। आशा है कि एक बार फिर यह विज्ञान के रूप में स्थापित होगा और लोगों के मार्गदर्शन का जो रास्ता ऋषियों ने दिखाया था, उसे फिर से समझा जा सकेगा।

शुभम् भूयात।

Thursday, November 24, 2016

नोटबंदी से बेअसर रहा ये डिजिटल गांव, सच में मेरा देश बदल रहा है...

शशांक शेखर बाजपेई। मेरा देश वाकई बदल रहा है और इसकी शुरुआत एक गांव से हो चुकी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आठ नवंबर को जब 500 और 1000 रुपए के नोट बंद करने की घोषणा की थी। उसके बाद देशभर में नोट बदलवाने के लिए बैंकों के बाहर और एटीएम में लाइन लग गई थी।

मगर, गुजरात के साबरकांठा जिले के हिम्मतनगर उप जिले में स्थित अकोदरा गांव में ऐसा नहीं हुआ। यहां चिप्स के पैकेट खरीदने से लेकर, सब्जी, दूध आदि के लिए नगद पैसे नहीं देने पड़ते हैं। 1500 की आबादी वाले इस गांव में 1200 लोगों के पास बैंक अकाउंट हैं।

पान की दुकान पर भी मोबाइल बैंकिंग और वाई-फाई नेटवर्क है। यही वजह है कि इसे देश के पहले डिजिटल गांव होने का गौरव मिला है। आईसीआईसीआई बैंक ने इस गांव को गोद लेकर पूरी तरह डिजिटल बना दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन-धन योजना का लाभ जैसे इस गांव ने उठाया है, वह काबिले तारीफ है।

गांव पूरी तरह से वाईफाई से लैस है, लेकिन काफी लोगों के पास स्मार्टफोन नहीं हैं। ऐसे में बैंक ने उन्हें एसएमएस के जरिए पैसा ट्रांसफर करने की सुविधा देता है। यहां के लोग सामान खरीदने के बाद फोन पर टेक्स्ट मैसेज भेजकर पैसे चुका देते हैं।

इस मैसेज में पेमेन्ट पाने वाले का अकाउंट नंबर और जितना पैसा ट्रांस्फर किया जाना है, उसकी जानकारी रहती है। यह मैसेज खरीदार अपने बैंक को भेजता है और फिर तुरंत भुगतान हो जाता है।

अहमदाबाद से 90 किमी की दूरी पर स्थित अकोदरा गांव अपने आप में एक मिसाल है। यहां स्कूल के बच्चे भी टैब से पढ़ते हैं और ज्ञान के लिए वे गुरू जी पर ही निर्भर नहीं हैं। गूगल बाबा की मदद से उन्हें देश-दुनिया की सारी खबर है। गांव के स्कूलों में ब्लैकबोर्ड की जगह स्मार्ट बोर्ड ने ले ली है। पढाई डिजिटल हो गई है और बच्चे भी पहले की तुलना में अधिक संख्या में पढ़ने के लिए स्कूल में आ रहे हैं।

डिस्कवरी चैनल ने इसकी डॉक्यूमेंट्ररी भी बनाई है। तो अब हुआ न आपको यकीन कि मेरा देश बदल रहा है... 

Wednesday, November 9, 2016

100 दिनों में क्या ट्रंप इन योजनाओं को दे पाएंगे अंजाम

'अमेरिका फर्स्ट' के वादे से लोगों के वोटों को अपनी जीत में बदलने वाले डोनाल्ड ट्रंप के लिए आने वाले दिन आसान नहीं होंगे। चुनाव अभियान के दौरान उन्होंने जो वादे किए थे, उन्हें पूरा करना आसान काम नहीं होगा।
शुरुआती 100 दिनों में उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना होगा। उन्होंने पिछले महीने पेनसिल्वेनिया के गेटिसबर्ग में अपने भाषण में पहले 100 दिनों का एजेंडा देश के सामने रखा था।
उन्होंने कहा था कि अमेरिका से 20 लाख अवैध प्रवासियों को देश निकालने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इस दौरान जो देश अपने नागरिकों को वापस लेने से इनकार करेंगे, उनकी वीजा मुक्त यात्रा की छूट खत्म की जाएगी।
ओबामा के हर सरकारी ऑर्डर को रद्द किया जाएगा। इसमें विवादास्पद रही ओबामा केयर पॉलिसी भी शामिल है। माना जा रहा है कि वह पाकिस्तान को मिलने वाली आर्थिक मदद को भी बंद कर देंगे, जो आतंकवाद के खिलाफ जंग के नाम पर दी जाती रही है। 
मुस्लिम विरोधी विवादास्पद बयान के कारण चर्चा में आए ट्रंप के सामने इस्लामिक कट्टरवाद से निपटना भी बड़ी चुनौती होगा। उनकी जीत की खबर सामने आने के बाद में अफगान तालिबान के प्रवक्ता ज़बीहुल्लाह मुजाहिद ने ट्रंप को संदेश दिया है कि अमेरिका को विकसित करने की नीति दूसरे देशों की आज़ादी छीनने वाली न हो।
मुजाहिद ने कहा कि दूसरे देशों की बर्बादी पर अपने राष्ट्रीय हित न देखे जाएं, ताकि दुनिया अमन के साथ रहे और मौजूदा जारी संकट खत्म हो। इसके साथ ही यह आशंका भी जाहिर की जा रही है कि वह रूस के साथ मिलकर चरमपंथी आतंकी संगठनों पर कड़ी कार्रवाई कर सकते हैं।
इसके साथ ही वह संयुक्त राष्ट्र के जलवायु परिवर्तन कार्यक्रम को दी जाने वाली अमेरिकी मदद पर भी रोक लगाएंगे। इन पैसों से वह अमेरिकी बुनियादी ढांचे का विकास करेंगे।