शशांक शेखर बाजपेई। न्यायाधीश माने जाने वाले शनि बुधवार 18 अप्रैल 2018 को धनु राशि में वक्री हो चुके हैं। वह गुरुवार, 6 सितंबर 2018 की शाम को फिर से मार्गी हो जाएंगे। जब भी कोई ग्रह धरती के करीब आ जाता है यानी वक्री हो जाता है, तो उसके फल देने की क्षमता बढ़ जाती है।
किसी भी ग्रह के वक्री होने से वह ग्रह उल्टी दिशा में नहीं चलने लगता है। दरअसल, उसकी गति इतनी धीमी हो जाती है कि धरती के सापेक्ष वह पीछे जाता हुआ दिखता है, जबकि असल में ऐसा होता नहीं है। ग्रह तो हमेशा ही अपने मार्ग पर चलते रहते हैं। हालांकि, पृथ्वी के सापेक्ष गति धीमी होने के कारण वे वक्री नजर आते हैं।
वक्री होने का असर
कोई भी ग्रह बुरा नहीं होता है और वह सभी को बुरे फल नहीं देता है। मगर, हर व्यक्ति की कुंडली में ग्रह की स्थिति अलग-अलग होती है। लिहाजा, उसकी के अनुसार ग्रह अच्छे या बुरे फल देते हैं। शनि को न्याय का देवता है, इसलिए पूर्व में किए गए कर्मों का फल देता है।
इसीलिए कुछ लोग शनि की दशा, महादशा, साढ़े साती में बर्बाद हो जाते हैं, तो वहीं कुछ लोग इस दौर में शीर्ष पर पहुंच जाते हैं। वक्री होने की दशा में ग्रहों के फल देने की क्षमता बढ़ जाती है। शनि सामान्य परिस्थितियों में जो फल धीरे-धीरे देता है, वक्री होने पर तेजी से देने लगता है।
इन पांच राशियों पर असर
वर्तमान समय में शनि की साढ़े साती वृश्चिक, धनु और मकर राशि पर चल रही है। वहीं, वृषभ और कन्या पर ढैय्या चल रही है। इन 5 राशियों के जातकों को विशेष रूप से सावधान रहने की जरूरत है। प्रतिकूल स्थितियों के चलते पारिवारिक जीवन में कलह हो सकती है।
काले कपड़े नहीं पहनें, वाहन सावधानी से चलाएं, धन के लेन-देन, बड़ा निवेश करने से पहले अच्छी तरह से सोच विचार कर ही फैसला करें। अगर आपके कर्म पूर्व में अच्छे रहे हैं और आपने किसी का बुरा नहीं किया है, तो शनि से डरने की जरूरत नहीं है।
कुंडली में शनि ग्रह यदि पीड़ित है, तो वह मानसिक कष्ट जरूर दे सकता है। इससे बचने के लिए शनि चालीसा और शनि स्त्रोत का पाठ करें। ऊं शनिश्चराय नम: मंत्र का जाप करें। हनुमान चालीसा, हनुमान आराधना करने से भी कष्टों से मुक्ति पा सकते हैं।
VIDEO : शनि का वक्री होना, जानें कैसे होता है कोई ग्रह वक्री
किसी भी ग्रह के वक्री होने से वह ग्रह उल्टी दिशा में नहीं चलने लगता है। दरअसल, उसकी गति इतनी धीमी हो जाती है कि धरती के सापेक्ष वह पीछे जाता हुआ दिखता है, जबकि असल में ऐसा होता नहीं है। ग्रह तो हमेशा ही अपने मार्ग पर चलते रहते हैं। हालांकि, पृथ्वी के सापेक्ष गति धीमी होने के कारण वे वक्री नजर आते हैं।
वक्री होने का असर
कोई भी ग्रह बुरा नहीं होता है और वह सभी को बुरे फल नहीं देता है। मगर, हर व्यक्ति की कुंडली में ग्रह की स्थिति अलग-अलग होती है। लिहाजा, उसकी के अनुसार ग्रह अच्छे या बुरे फल देते हैं। शनि को न्याय का देवता है, इसलिए पूर्व में किए गए कर्मों का फल देता है।इसीलिए कुछ लोग शनि की दशा, महादशा, साढ़े साती में बर्बाद हो जाते हैं, तो वहीं कुछ लोग इस दौर में शीर्ष पर पहुंच जाते हैं। वक्री होने की दशा में ग्रहों के फल देने की क्षमता बढ़ जाती है। शनि सामान्य परिस्थितियों में जो फल धीरे-धीरे देता है, वक्री होने पर तेजी से देने लगता है।
इन पांच राशियों पर असर
वर्तमान समय में शनि की साढ़े साती वृश्चिक, धनु और मकर राशि पर चल रही है। वहीं, वृषभ और कन्या पर ढैय्या चल रही है। इन 5 राशियों के जातकों को विशेष रूप से सावधान रहने की जरूरत है। प्रतिकूल स्थितियों के चलते पारिवारिक जीवन में कलह हो सकती है।
काले कपड़े नहीं पहनें, वाहन सावधानी से चलाएं, धन के लेन-देन, बड़ा निवेश करने से पहले अच्छी तरह से सोच विचार कर ही फैसला करें। अगर आपके कर्म पूर्व में अच्छे रहे हैं और आपने किसी का बुरा नहीं किया है, तो शनि से डरने की जरूरत नहीं है।
कुंडली में शनि ग्रह यदि पीड़ित है, तो वह मानसिक कष्ट जरूर दे सकता है। इससे बचने के लिए शनि चालीसा और शनि स्त्रोत का पाठ करें। ऊं शनिश्चराय नम: मंत्र का जाप करें। हनुमान चालीसा, हनुमान आराधना करने से भी कष्टों से मुक्ति पा सकते हैं।
VIDEO : शनि का वक्री होना, जानें कैसे होता है कोई ग्रह वक्री
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