Thursday, March 5, 2015

आप, तुम, तू और अब तू-तू, मैं-मैं

शशांक शेखर बाजपेई 

आप बहुत दिनों तक आप नहीं रहता है। प्‍यार में कुछ दिनों में तुम, तुम से तू हो ही जाता है और फिर होती है तू-तू, मैं-मैं। कमोबेश यही हाल आम आदमी पार्टी यानी 'आप' का भी हो रहा है। पार्टी के बनने के समय सब 'आम आदमी' बनने के लिए गलाकाट प्रतिस्‍पर्धा कर रहे थे। सबसे ज्‍याद 'आम' कौन? अब आम से खास बनने की होड़ मची है। यही पार्टी में कलह का कारण है, चाहे कोई माने या नहीं माने।     

कल तक के 'आम आदमी' प्रशांत भूषण और योगेंद्र यादव ने खास बन चुके आम आदमी अरविंद केजरीवाल पर उंगली उठाई। कहा गया कि वह मुख्‍यमंत्री बनने के बाद दो पदों पर नहीं रह सकते। ऐसे में उन पर पार्टी के राष्‍ट्रीय संयोजक के पद को छोड़ देना चाहिए। हालांकि, यह मांग उठनी इसलिए भी लाजिमी थी क्‍योंकि दो 'आम आदमी' (प्रशांत भूषण और योगेंद्र यादव) को काफी मेहनत के बावजूद कोई राजनीतिक लाभ नहीं हुआ था और वे खास नहीं बन पाए थे। ऐसे में कम से कम राष्‍ट्रीय संयोजक के पद पर तो काबिज होने की महत्‍वाकांक्षा होनी ही थी।

देखा जाए तो यह मांग गलत भी नहीं थी, क्‍योंकि केजरीवाल दिल्‍ली के मुख्‍यमंत्री रहते हुए इस पद के साथ न्‍याय नहीं कर सकते थे। मगर, वह यह पद यथा संभव छोड़ना भी नहीं चाहते थे क्‍योंकि मुख्‍यमंत्री पद आज है कल नहीं। हालां‍कि, इस बीच यह घोषणा उन्‍होंने जरूर की थी कि उन्‍होंने राष्‍ट्रीय संयोजक के पद से इस्‍तीफा दे दिया है। इस्‍तीफा 26 फरवरी को दिया गया था, लेकिन यह जानकारी काफी बवाल होने के बाद मीडिया में दो-तीन दिन बाद सामने आई।

आप में केजरीवाल के चाटुकारों की फौज को देखते हुए यह नहीं कहा जा सकता है कि उन्‍होंने सच में ही 26 फरवरी को इस्‍तीफा दिया हो। हो सकता है कि बवाल के बाद उन्‍होंने इस्‍तीफे पर 26 फरवरी की बैक डेट डाल दी हो, ताकि पार्टी में मची घमासान के बढ़ने पर उन्‍हें त्‍याग की मूर्ति के रुप में पेश किया जा सके।

बहरहाल 'आप' की पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी (पीएसी) से योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण को निकाल दिया गया है। फिर भी पार्टी में चल रही कलह की आग अभी पूरी तरह बुझी नहीं हुई है। अब राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य और महाराष्ट्र से पार्टी के बड़े नेता मयंक गांधी ने बागी रुख अख्तियार करते हुए सीधे-सीधे केजरीवाल पर उंगली उठाई है।

बुधवार को करीब साढ़े 5 घंटे लंबी चली बैठक के बाद राष्ट्रीय कार्यकारिणी के 21 में से 19 सदस्यों के बीच वोटिंग हुई थी। योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण को हटाने के प्रस्ताव के विरोध में 8 और पक्ष में 11 वोट पड़े, जबकि दोनों नेता स्‍वेच्‍छा से पद छोड़ने को तैयार थे और उन्‍हें पार्टी में कोई दूसरी जिम्‍मेदारी दी जा सकती थी। पार्टी की अनुशासन समिति के प्रमुख प्रोफेसर आनंद कुमार ने कहा कि इस मुद्दे पर आगे कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। अगर किसी को कोई शिकायत है, तो वह पार्टी के लोकपाल के पास जा सकता है।

उन्होंने कहा कि केजरीवाल ने साफ-साफ कह दिया था योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण पीएसी में रहते हैं तो मैं काम नहीं कर पाऊंगा। मयंक गांधी ने ब्लॉग लिखकर यह भी कहा कि वह जानते हैं कि इस खुलासे से उन्हें भी इसके नतीजे भुगतने पड़ सकते हैं। मयंक के ब्लॉग पर टिप्पणी करते हुए योगेंद्र यादव ने कहा कि अंतत: सत्य सामने आ ही जाता है।

मयंक ने अपने ब्लॉग में लिखा है, 'प्यारे कार्यकर्ताओ, मैं इस बाते के लिए माफी चाहता हूं कि राष्ट्रीय कार्यकारिणी में जो कुछ भी हुआ उसके बारे में बाहर नहीं बोलने के आदेश को तोड़ रहा हूं। वैसे, मैं पार्टी का अनुशासित सिपाही हूं। अरविंद कहते थे कि जब वे लोग 2011 में लोकपाल को लेकर जॉइंट ड्राफ्ट कमिटी में काम कर रहे थे तो कपिल सिब्बल उनसे कहा करते थे कि बाहरी दुनिया को कुछ न बताएं। इसके जवाब में अरविंद कहा करते थे कि राष्ट्र को कार्यवाही के बारे में बताना उनकी प्राथमिक ड्यूटी है क्योंकि वह नेता नहीं लोगों के प्रतिनिधि हैं।'

उन्होंने आगे लिखा है, 'राष्ट्रीय कार्यकारिणी में मैं सिर्फ कार्यकर्ताओं के प्रतिनिधि के तौर पर शामिल था और ऐसे में वह आदेश मानकर मैं भी बेईमान बन जाऊंगा। पार्टी कार्यकर्ताओं से है, इसलिए उन्हें चुनिंदा लीक और इधर-उधर के बयानों के बजाय सीधी जानकारी मिलनी चाहिए। मैं मीटिंग के तथ्यों को सार्वजनिक रूप से सामने रखना चाहता हूं।

पिछली रात मुझे कहा गया था कि अगर मैंने बाहर कुछ कहा तो मेरे खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी, लेकिन मेरी पहली निष्ठा सर्वोच्च सच के प्रति है। मैं प्रशांत भूषण और योगेंद्र यादव को निकाले जाने का घटनाक्रम संक्षेप में बता रहा हूं और राष्ट्रीय कार्यकारिणी से आग्रह करता हूं कि मीटिंग का पूरा ब्योरा सामने लाया जाए।'

ऐसे में साफ है कि आप में एक धड़ा योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण के साथ भी खड़ा है, जो केजरीवाल की मनमानी और पार्टी में उनके चाटुकारों के बीच केजरीवाल के जमे प्रभुत्‍व को तोड़ना चाहता है। ऐसे में यह देखना दिलचस्‍प होगा कि आप से तुम और तुम से तू के बाद शुरू हुई यह तू-तू, मैं-मैं आगे कहां तक जाती है।

संपर्क करें : ssbajpaidata@gmail.com

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