दक्षिण अफ्रीका के 'गांधी' मंडेला नहीं रहे
दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद नीति के खिलाफ संघर्ष में महात्मा गांधी से प्रेरणा लेने वाले और देश के पहले अश्वेत राष्ट्रपति नेल्सन मंडेला का लंबी बीमारी के कारण शुक्रवार को यहां उनके आवास पर निधन हो गया। वे 95 वर्ष के थे। उनका अंतिम संस्कार 15 दिसंबर को किया जाएगा। जन्म के समय मंडेला के पिता नकोसी मफाकन्यीसवा गडला हेनरी ने उनका नाम रोलीहलाहला रखा था। दक्षिण अफ्रीका की आधिकारिक भाषा में इसका मतलब ‘परेशान करने वाला’ होता है। शायद मंडेला के भविष्य को ध्यान में रखते हुए खुद ईश्वर ने यह नाम उनके लिए तय किया हो। रंगभेद की नीति को खत्म करने के लिए उन्होंने गोरों के खिलाफ न केवल व्यापक स्तर पर आंदोलन किया, बल्कि उसे खत्म कर दक्षिण अफ्रीका को रेनबो नेशन बना दिया। उनसे जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें।![]() |
| जोहान्सबर्ग में मंडेला के घर के बाहर उन्हें श्रद्धांजिल देने के लिए जमा हुए द. अफ्रीकी नागरिक। |
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समाचार पत्रों में मंडेला के निधन की खबर प्रमुखता से प्रकाशित की गई। |
गांधी के प्रशंसक
सत्य और
अहिंसा के लिए महात्मा गांधी की प्रशंसा करने वाले मंडेला ने 1993 में
दक्षिण अफ्रीका में गांधी स्मारक का अनावरण किया। उस वक्त उन्होंने कहा था
कि गांधी हमारे इतिहास का अभिन्न् हिस्सा हैं। उन्होंने यहीं सबसे पहले
सत्य के साथ प्रयोग किया, यहीं उन्होंने न्याय के लिए अपनी दढ़ता जताई, यहीं
उन्होंने एक दर्शन एवं संघर्ष के तरीके के रूप में सत्याग्रह का विकास
किया। मंडेला ने कहा था गांधी का सबसे ज्यादा आदर अहिंसा के प्रति उनकी
प्रतिबद्धता के लिए किया जाता है। अफ्रीकन नेशनल कांग्रेस का आंदोलन
गांधीवादी दर्शन से बहुत ज्यादा प्रभावित था। इसी दर्शन ने 1952 के अवज्ञा
अभियान के दौरान लाखों दक्षिण अफ्रीकियों को एकजुट करने में मदद की। इस
अभियान ने ही एएनसी को लाखों जनता से जुड़े एक संगठन के तौर पर स्थापित
किया। यही वजह है कि उन्हें दक्षिण अफ्रीका का गांधी भी कहा जाता है।
उन्हें भारत की ओर से 1990 में भारत रत्न दिया गया था।
टीचर ने दिया नेल्सन नाम
मंडेला
का जन्म 1918 में केप ऑफ साउथ अफ्रीका के पूर्वी हिस्से के एक छोटे से
गांव के थेंबू समुदाय में हुआ था। मंडेला का मूल नाम रोलिहलाहला दलिभुंगा
था। उनके स्कूल में एक शिक्षक ने उन्हें उनका अंग्रेजी नाम नेल्सन दिया।
उन्हें अक्सर उनके कबीले मदीबा के नाम से बुलाया जाता था। थेंबू के शाही
परिवार के सलाहकार रहे पिता की मौत के वक्त मंडेला नौ साल के थे।
यूनिवर्सिटी में जागा जुनून
अफ्रीकानेर
विटवाटरस्रांड विश्वविद्यालय में वकालत की पढ़ाई करने के दौरान मंडेला की
मुलाकात सभी नस्लों और पृष्टभूमि के लोगों से हुई। इस दौरान उदारवादी,
कट्टरपंथी और अफ्रीकी विचारधाराओं के संपर्क में आने के साथ ही उन्होंने
नस्लभेद और भेदभाव को महसूस किया। इससे राजनीतिक के प्रति उनमें जुनून पैदा
हुआ। इसी साल मंडेला अफ्रीकन नेशनल कांग्रेस (एएनसी) में शामिल हुए और बाद
में एएनसी यूथ लीग की सहस्थापना की।
ये रहे अहम घटनाक्रम
1944 में एवेलिन मैसे के साथ पहली शादी की, चार बच्चों के पिता बने। 1958 में दोनों का तलाक हो गया। इसके बाद मंडेला ने वकालत शुरू कर दी और 1952 में ओलिवर टांबो के साथ मिलकर देश के पहले अश्वेत वकालत संस्था की शुरुआत की। 1956 में 155 अन्य कार्यकर्ताओं के साथ मंडेला पर देशद्रोह का मामला चला, लेकिन चार साल की सुनवाई के बाद उनके खिलाफ लगे आरोप हटा लिए गए। 1958 में मंडेला ने विनी मादीकीजेला से शादी की, जिन्होंने बाद में अपने पति को कैद से रिहा कराने के लिए चलाए गए अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 1960 में एएनसी को गैरकानूनी घोषित कर दिया गया और मंडेला भूमिगत हो गए। 1960 में रंगभेदी शासन के साथ तनाव बहुत बढ़ गया जब शारपेविले नरसंहार में पुलिस ने 69 अश्वेतों की गोलीमार कर हत्या कर दी। इससे अब तक चले आ रहे शांतिपूर्ण प्रतिरोध का अंत हो गया और एएनसी के तत्कालीन उपाध्यक्ष मंडेला ने आर्थिक कार्रवाई शुरू कर दी।इसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और उनपर तोड़फोड़ एवं सरकार को हटाने के लिए हिंसा का सहारा लेने के आरोप दर्ज किए गए। ऐतिहासिक सुनवाई के दौरान उन्होंने कहा, मैंने एक लोकतांत्रिक एवं स्वतंत्र समाज के आदर्श का सपना देखा है, जिसमें सब लोग सदभाव एवं समान अवसरों के साथ रहें। मंडेला रोबेन द्वीप पर 18 साल कैद रहे और 1982 में उन्हें यहां से पोल्समूर जेल में स्थानांतरित किया गया। मंडेला की रिहाई पर भारी भीड़ ने उनका स्वागत किया। दिसंबर 1993 में मंडेला और अफ्रीका के तत्कालीन राष्ट्रपति एफ डब्ल्यू डी क्लार्क को नोबल शांति पुरस्कार दिया गया।
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| द. अफ्रीकी दूतावास के सामने मंडेली की हाल में स्थापित की गई मूर्ति के सामने पांच दिसंबर को खड़े पत्रकार मंडेला के शुभचिंतकों से उनकी सेहत के बारे में जानकारी ले रहे थे। |



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